संक्षिप्त सार
भक्तिकाल की सगुण धारा में ईश्वर को साकार रूप में पूजा गया। इसकी दो शाखाएँ हैं: रामभक्ति शाखा और कृष्णभक्ति शाखा। रामकाव्य के शिखर कवि तुलसीदास और कृष्णकाव्य के शिखर कवि सूरदास हैं। तुलसी ने अवधी और ब्रज दोनों में, सूर ने ब्रजभाषा में अमर साहित्य रचा।
मुख्य बिंदु
- सगुण भक्ति में ईश्वर के अवतार (राम, कृष्ण) की लीलाओं का गान है।
- रामभक्ति शाखा: राम को मर्यादा पुरुषोत्तम माना गया; दास्य भाव की भक्ति; लोकमंगल की भावना।
- रामकाव्य के कवि: तुलसीदास, अग्रदास, नाभादास (भक्तमाल)। केशवदास की रामचंद्रिका भी रामकथा पर है।
- तुलसीदास की प्रमुख रचनाएँ: रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्ण गीतावली, बरवै रामायण, हनुमान बाहुक, जानकी मंगल, पार्वती मंगल।
- रामचरितमानस अवधी में, दोहा-चौपाई छंदों में, सात कांडों में रचित है। तुलसी ने इसकी रचना संवत 1631 में आरंभ की।
- कृष्णभक्ति शाखा: वल्लभाचार्य का पुष्टिमार्ग; सख्य, वात्सल्य और माधुर्य भाव की भक्ति।
- वल्लभाचार्य के पुत्र विट्ठलनाथ ने अष्टछाप की स्थापना की: सूरदास, कुंभनदास, परमानंददास, कृष्णदास (वल्लभाचार्य के शिष्य) और नंददास, छीतस्वामी, गोविंदस्वामी, चतुर्भुजदास (विट्ठलनाथ के शिष्य)।
- सूरदास की रचनाएँ: सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी। वे वात्सल्य और श्रृंगार के श्रेष्ठ कवि माने जाते हैं।
- सूरसागर का भ्रमरगीत प्रसंग प्रसिद्ध है, जिसमें गोपियाँ उद्धव के ज्ञान-मार्ग पर प्रेम-मार्ग को श्रेष्ठ सिद्ध करती हैं।
- अन्य कृष्णभक्त कवि: मीराबाई (पदावली), रसखान (सुजान रसखान, प्रेमवाटिका), नंददास (रासपंचाध्यायी, भँवरगीत)।
- कृष्णकाव्य मुख्य रूप से ब्रजभाषा में और गेय पद शैली में है।
महत्वपूर्ण शब्द
- सगुण भक्ति – साकार ईश्वर की भक्ति।
- दास्य भाव – स्वयं को ईश्वर का सेवक मानना (तुलसी)।
- सख्य भाव – ईश्वर को मित्र मानना।
- वात्सल्य – संतान के प्रति माता-पिता का प्रेम (सूर के बालकृष्ण)।
- पुष्टिमार्ग – ईश्वर की कृपा (पुष्टि) से प्राप्त होने वाली भक्ति।
- अष्टछाप – पुष्टिमार्ग के आठ कवियों का समूह।
- भ्रमरगीत – भौंरे के बहाने उद्धव को दिया गया गोपियों का उपालंभ।
महत्वपूर्ण तिथियाँ और व्यक्ति
- तुलसीदास – रामचरितमानस (रचना आरंभ सं. 1631), विनय पत्रिका आदि।
- सूरदास – सूरसागर; अष्टछाप के सर्वश्रेष्ठ कवि।
- वल्लभाचार्य – पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक।
- विट्ठलनाथ – अष्टछाप के संस्थापक।
- मीराबाई – कृष्ण को पति रूप में मानकर पद रचे।
- रसखान – मुस्लिम कृष्णभक्त कवि, सवैयों के लिए प्रसिद्ध।
- नाभादास – भक्तमाल (भक्तों का परिचय)।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. अष्टछाप के कवियों के नाम लिखिए।
सूरदास, कुंभनदास, परमानंददास, कृष्णदास, नंददास, छीतस्वामी, गोविंदस्वामी और चतुर्भुजदास। इनकी स्थापना विट्ठलनाथ ने की थी।
Q2. तुलसीदास की किन्हीं चार रचनाओं के नाम लिखिए।
रामचरितमानस, विनय पत्रिका, कवितावली और गीतावली। इसके अलावा दोहावली और हनुमान बाहुक भी प्रसिद्ध हैं।
Q3. रामभक्ति शाखा की प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
- राम मर्यादा पुरुषोत्तम और शील, शक्ति, सौंदर्य के प्रतीक।
- दास्य भाव की भक्ति।
- लोकमंगल और आदर्श समाज की कल्पना।
- समन्वय की भावना (शैव-वैष्णव, ज्ञान-भक्ति)।
- अवधी और ब्रज दोनों भाषाएँ।
- प्रबंध और मुक्तक दोनों काव्य-रूप; दोहा, चौपाई, कवित्त, सवैया।
Q4. सूरदास के वात्सल्य वर्णन पर प्रकाश डालिए।
- बालकृष्ण की लीलाओं का स्वाभाविक चित्रण।
- माता यशोदा का स्नेह, चिंता और गर्व।
- बाल-मनोविज्ञान की गहरी समझ (चोटी बढ़ने की चिंता, माखन चोरी)।
- संयोग और वियोग दोनों पक्ष।
- ब्रजभाषा की मधुरता, गेय पद।
- इसी कारण सूर को वात्सल्य रस का सम्राट कहा जाता है।
Q5. कृष्णभक्ति शाखा की विशेषताएँ बताइए।
- कृष्ण के लोकरंजक रूप की लीलाएँ।
- सख्य, वात्सल्य और माधुर्य भाव।
- पुष्टिमार्ग का प्रभाव।
- ब्रजभाषा और गीति शैली।
- श्रृंगार का संयोग-वियोग वर्णन; भ्रमरगीत परंपरा।
- संगीत और राग-रागिनियों पर आधारित पद।
परीक्षा टिप
तुलना वाले प्रश्न (तुलसी बनाम सूर) में भक्ति भाव, भाषा, काव्य-रूप और प्रमुख रस को एक-एक बिंदु में अलग करके लिखें।