"हे मातृभूमि !" क्रांतिकारी कवि रामप्रसाद 'बिस्मिल' की देशभक्ति कविता है। कवि मातृभूमि के चरणों में सिर झुकाता है और अपना मन, शरीर, सब कुछ उसकी सेवा में अर्पित करना चाहता है। कविता में देशहित में निछावर हो जाने की लालसा व्यक्त हुई है।
"वारिस कौन ?" विभा रानी की एक संवादात्मक कहानी है। एक राजा अपनी चार बेटियों की बुद्धिमानी परखने के लिए हर एक को गेहूँ के सौ दाने देता है। जो बेटी दानों को बोकर पाँच साल में ढेर सारा गेहूँ उगाती है, वही राज्य की सच्ची उत्तराधिकारी बनती है। संदेश: समय और साधनों का सही उपयोग करने वाला ही सफल होता है।
मुख्य बिंदु
लेखिका: विभा रानी (जन्म: 1959, मधुबनी, बिहार) – हिंदी व मैथिली की राष्ट्रीय स्तर की लेखिका; कहानी, गीत, अनुवाद, लोकसाहित्य और नाटक लेखन।
प्रमुख कृतियाँ: "चल खुसरो घर अपने", "मिथिला की लोककथाएँ", "गोनू झा के किस्से" (कहानी संग्रह), "अगले जनम मोहे बिटिया न कीजो" (नाटक) आदि।
राजा ने चारों बेटियों को गेहूँ के सौ-सौ दाने दिए और पाँच साल बाद वापस माँगने को कहा।
बड़ी बेटी: दाने खिड़की से बाहर फेंक दिए; सोचा भंडार से दे दूँगी।
दूसरी बेटी: दानों को चाँदी की डिब्बी में, मखमल के थैले में बंद करके संदूकची में रख दिया – दाने सड़ गए।
तीसरी बेटी: सोचा कि पिता ने किसी मकसद से दाने दिए हैं; दानों को खिड़की के पीछे की जमीन में बो दिया और हर साल फसल के दाने फिर से बोती रही।
चौथी (छोटी) बेटी: दाने भुनवाकर खा गई।
पाँच साल बाद तीसरी बेटी राजा को रथ से खेत तक ले गई, जहाँ गेहूँ की बालियाँ लहरा रही थीं – सौ दाने लाखों दाने बन गए थे।
राजा ने उसे गले लगाकर कहा कि तुम ही मेरे राज्य की सच्ची उत्तराधिकारी हो।
महत्वपूर्ण शब्द
वारिस / उत्तराधिकारी – जिसे किसी की संपत्ति या पद मिलता है।
मकसद – उद्देश्य।
तनिक – थोड़ा।
खोल – आवरण।
उम्मीद – आशा।
भाषा अध्ययन
चक्कर में पड़ जाना = दुविधा में पड़ना। वाक्य: दो रास्ते देखकर वह चक्कर में पड़ गया।
गले लगाना = प्यार से मिलना। वाक्य: जीतकर लौटे बेटे को माँ ने गले लगा लिया।
मुहावरे:
सरल वाक्य (एक ही क्रिया/विधेय): राजा ने चारों बेटियों को बुलाया।
संयुक्त वाक्य (और, पर, लेकिन, या से जुड़े दो स्वतंत्र वाक्य): उसने दाने बोए और फसल तैयार हो गई।
मिश्र वाक्य (एक मुख्य + एक आश्रित उपवाक्य, कि/जो/क्योंकि से): राजा ने सोचा कि जो सबसे बुद्धिमती होगी, उसे राज्य मिलेगा।
रचना के आधार पर वाक्य के भेद:
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. गेहूँ के दानों का चारों बहनों ने क्या किया?
बड़ी ने फेंक दिए, दूसरी ने डिब्बी में सँभालकर रखे (सड़ गए), तीसरी ने बोकर फसल उगाई, चौथी ने भुनवाकर खा लिए।
Q2. सही विकल्प चुनकर वाक्य पूरा करो: "तुम ही मेरे राज्य की सच्ची ------- हो।" (रानी/युवराज्ञी/उत्तराधिकारी)
तुम ही मेरे राज्य की सच्ची उत्तराधिकारी हो।
Q3. घटनाक्रम के अनुसार वाक्य लगाओ।
अंत में राजा को एक उपाय सूझ गया।
सभी के उत्तर से राजा को बड़ी निराशा हुई।
रथ एक बड़े-से हरे-भरे खेत के सामने रुक गया।
राजा ने हैरानी से राजकुमारी की ओर देखा।
Q4. तीसरी राजकुमारी को ही राज्य क्यों मिला?
उसने सोचा कि पिता के इस काम के पीछे जरूर कोई मकसद है।
उसने दानों को बेकार नहीं जाने दिया, बोकर बढ़ाया।
पाँच साल तक धैर्य और मेहनत से काम किया।
उसने साधनों का सही उपयोग किया – यही राजा के लिए बुद्धिमानी की कसौटी थी।
Q5. कहानी से मिलने वाली सीख लिखो।
छोटे साधनों का भी सही उपयोग करो तो बड़ा फल मिलता है।
बिना सोचे फेंकना या केवल सँभालकर रखना, दोनों से कुछ नहीं बढ़ता।
धैर्य, मेहनत और दूरदृष्टि से ही सफलता मिलती है।
बुद्धिमान वही है जो काम के पीछे का उद्देश्य समझे।
परीक्षा टिप
चारों बहनों की तालिका (बहन – दानों का क्या किया – परिणाम) बनाकर लिखो; ऐसी कृति लगभग हर परीक्षा में आती है।
"नाखून क्यों बढ़ते हैं ?" आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का वैचारिक निबंध है। लेखक की छोटी बेटी के एक सवाल से निबंध शुरू होता है। लेखक कहते हैं कि नाखून का बढ़ना मनुष्य के अंदर की पशुता का प्रतीक है और उन्हें काटना मनुष्यता का। जैसे हम नाखून काटते हैं, वैसे ही हमें अपनी बुरी आदतें छोड़नी चाहिए।
मुख्य बिंदु
लेखक: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी (जन्म: 1907, बलिया, उ.प्र.)। वे मौलिक निबंधकार, समालोचक और उपन्यासकार थे; हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और बांग्ला के विद्वान।
प्रमुख कृतियाँ: "अशोक के फूल", "कल्पलता" (निबंध); "बाणभट्ट की आत्मकथा", "पुनर्नवा" (उपन्यास)।
विधा: वैचारिक निबंध।
बेटी ने पूछा – आदमी के नाखून क्यों बढ़ते हैं? लेखक तुरंत उत्तर न दे सके।
लाखों वर्ष पहले जंगली मनुष्य के लिए नाखून ही अस्त्र थे, जीवन-रक्षा के लिए जरूरी थे।
धीरे-धीरे मनुष्य ने हड्डियों के, फिर धातु के हथियार बनाए।
आज मनुष्य नाखून नहीं चाहता; बढ़े नाखून उसकी पाशवी वृत्ति (पशुता) के प्रतीक हैं।
लेखक पूछते हैं – मनुष्य पशुता की ओर बढ़ रहा है या मनुष्यता की ओर? आज बढ़ते अस्त्र-शस्त्र भी पशुता की निशानी हैं।
अपने आप पर लगाया हुआ बंधन (आत्मबंधन, संयम) हमारी संस्कृति की बड़ी विशेषता है।
मनुष्य पशु से अलग है क्योंकि उसमें संयम, दूसरों के सुख-दुख के प्रति संवेदना, श्रद्धा, तप और त्याग है।
मनुष्य की चरितार्थता (सार्थकता) प्रेम, मैत्री और त्याग में है।
महत्वपूर्ण शब्द
पाशवी – पशु जैसी।
वनमानुष – बंदर की एक प्रजाति; जंगली मनुष्य।
निर्बोध – अनजान, भोली।
द्योतक – प्रतीक, सूचक।
घृणा – नफरत।
लुप्त – गायब।
चरितार्थता – जीवन की सार्थकता।
भाषा अध्ययन
कठिन लिंग वाले शब्द: आत्मा (स्त्रीलिंग), पुस्तक (स्त्रीलिंग); व्यक्ति, बादल, तार, नोट, नाखून, तकिया, दही (पुल्लिंग)। जैसे: दही खट्टा है। पुस्तक नई है।
विधानार्थक: नाखून हर तीसरे दिन बढ़ जाते हैं।
निषेधार्थक: मनुष्य अब नाखून नहीं चाहता।
प्रश्नार्थक: नाखून क्यों बढ़ते हैं?
आज्ञार्थक: नाखून काट दो।
विस्मयादिबोधक: अरे! कितने बड़े नाखून हैं!
इच्छार्थक: तुम्हारा जीवन सुखी हो।
संदेहार्थक: शायद वह कल आएगा।
संकेतार्थक: यदि मेहनत करोगे तो सफल होगे।
अर्थ के आधार पर वाक्य के भेद:
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. लेखक के अनुसार मनुष्य पशु से किन बातों में भिन्न है?
मनुष्य में संयम है, दूसरों के सुख-दुख के प्रति संवेदना है, श्रद्धा, तप और त्याग है। वह झगड़े को आदर्श नहीं मानता।
Q2. प्राचीन काल में नाखून मनुष्य के लिए क्यों जरूरी थे?
तब मनुष्य जंगली था। जीवन-रक्षा के लिए नाखून ही उसके अस्त्र थे; दाँतों के बाद उन्हीं का स्थान था।
Q3. मनुष्य के हथियारों का विकास क्रम लिखो।
पहले नाखून और दाँत।
फिर हड्डियों के हथियार।
फिर धातु के हथियार।
आज भयंकर अस्त्र-शस्त्र (मरणास्त्र) – जो पशुता के बढ़ने के प्रतीक हैं।
Q4. "नाखून बढ़ना पशुता का और काटना मनुष्यता का प्रतीक है" – स्पष्ट करो।
नाखून बिना बुलाए अपने आप बढ़ते हैं, जैसे क्रोध और घृणा बिना सिखाए आते हैं।
यह मनुष्य की अंध सहजात वृत्ति है।
उन्हें काटना मनुष्य का अपना निर्णय, अपना संयम है।
इसी तरह बुराइयों को काटकर हम सच्चे मनुष्य बनते हैं।
Q5. "सुरक्षा हेतु शस्त्रों की भरमार" – इस विषय पर अपने विचार लिखो।
देश की रक्षा के लिए शस्त्र जरूरी हैं।
पर हथियारों की होड़ डर और युद्ध का खतरा बढ़ाती है।
वह धन शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी हटाने में लगना चाहिए।
सच्ची सुरक्षा आपसी विश्वास, संवाद और शांति से आती है।
परीक्षा टिप
निबंध का मुख्य विचार एक पंक्ति में लिखना सीखो: "नाखून पशुता के और उन्हें काटना मनुष्यता के प्रतीक हैं।" अधिकतर प्रश्न इसी से जुड़े होते हैं।
"गाँव-शहर" कवि प्रदीप शुक्ल का एक नवगीत है। इसमें कवि ने गाँव और शहर, दोनों के दर्द को दिखाया है। शहर में भीड़ और भागदौड़ है, जबकि गाँव खाली हो रहे हैं क्योंकि लोग कमाने के लिए शहर जा रहे हैं। कविता की टेक है कि शहर आँखें फाड़कर देख रहा है और गाँव बेबस होकर टुकुर-टुकुर देख रहा है।
मुख्य बिंदु
कवि: प्रदीप शुक्ल (जन्म: 1967, लखनऊ, उत्तर प्रदेश)। प्रमुख कृतियाँ: "अम्मा रहती गाँव में" (नवगीत संग्रह), "गुल्लू का गाँव" (बालगीत संग्रह)।
विधा: नवगीत।
मौसम और सुर, सब कुछ बदला-बदला सा लगता है।
शहर में इतनी भीड़ है कि तिल रखने की भी जगह नहीं है।
गाँव में पीपल के सारे पत्ते झड़ गए हैं, यानी गाँव सूना और उदास है।
गाँव से आया कोई गरीब आदमी शहर में मेट्रो के खंभे के नीचे रात गुजारता है।
शहर में हर कोई आँख खुलते ही बस दौड़ता रहता है।
गाँव में रामदीन स्टेशन पर (शहर गए अपनों की) राह जोह रहा है। रेडियो पर शहर की बातें सुनकर दिल धुकुर-पुकुर (धक-धक) करता है।
सुरसतिया के दोनों बेटे कमाने के लिए सूरत चले गए; खेतों में अब गिलहरियाँ धूप सेंकती हैं।
सड़कों ने गाय के खुर "खा डाले", इसलिए वह लँगड़ाकर चलती है – यह शहरीकरण की मार है।
मुख्य विषय: शहर की भागदौड़, गाँवों से पलायन (स्थानांतर), गाँवों का शहरीकरण।
महत्वपूर्ण शब्द
नवगीत – आधुनिक जीवन की बातों को लोकधुन जैसी लय में कहने वाला गीत।
पलायन – रोजी-रोटी के लिए अपना गाँव छोड़कर दूसरी जगह जाना।
दीदा – आँख, दृष्टि।
गिल्ली – गिलहरी।
गैया – गाय।
आलम – दुनिया, जहान।
घमाना – धूप खाना, धूप सेंकना।
परमेसुर – परमेश्वर (यहाँ एक व्यक्ति का नाम)।
भाषा अध्ययन
पुनरुक्त शब्द (एक ही शब्द दोबारा): बदला-बदला, टुकुर-टुकुर, धुकुर-पुकुर। इनसे भाव और गहरा होता है।
मुहावरा: तिल रखने की जगह न होना = बहुत भीड़ होना। वाक्य: मेले में तिल रखने की जगह नहीं थी।
"मधुबन" एक साक्षात्कार (इंटरव्यू) है। लेखक अनुराग वर्मा प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार डॉ. रामकुमार वर्मा से उनके प्रयाग (इलाहाबाद) स्थित निवास "मधुबन" में मिलते हैं। डॉ. वर्मा अपनी काव्य-प्रेरणा, स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने, हिंदी प्रेम और राजनीति के बारे में खुलकर बताते हैं।
मुख्य बिंदु
लेखक: अनुराग वर्मा, हिंदी के जाने-माने लेखक; उनकी भाषा सरल और प्रवाही है।
"मधुबन" डॉ. रामकुमार वर्मा के प्रयाग स्टेशन के पास स्थित घर का नाम है। मिलने का समय सुबह 10 बजे तय था।
लेखक के मन में विचारों का ज्वार उठ रहा था कि इतने बड़े साहित्यकार का व्यवहार कैसा होगा।
सन 1921 में, केवल साढ़े पंद्रह वर्ष की उम्र में, डॉ. वर्मा ने गांधीजी के असहयोग आंदोलन में भाग लिया।
नरसिंहपुर (मध्य प्रदेश) में मौलाना शौकत अली ने कहा कि गांधीजी के अनुसार अंग्रेजी तालीम गुलाम बनाने का नुस्खा है। तब उन्होंने माँ के सामने स्कूल न जाने की घोषणा कर दी।
एक डिप्टी कलेक्टर के बेटे का यह विद्रोह देखकर लोग सकते में आ गए।
वे राष्ट्रीय ध्वज लेकर प्रभात फेरी करते थे; इसी समय देशप्रेम पर लिखी कविता उनकी कविता का "मंगलाचरण" बनी।
हिंदी प्रेम उन्हें मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश लाया, क्योंकि उन दिनों नागपुर विश्वविद्यालय में हिंदी नहीं थी। 1925 में इंटर पास करके प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और एम.ए. प्रथम श्रेणी में पास किया।
1926 में विवाह हुआ; 1930 में "कबीर का रहस्यवाद" लिखा। बचपन से अभिनय का शौक था।
वे राजनीति से हमेशा दूर रहे, क्योंकि आज की राजनीति में स्थिरता का अभाव है; वे स्वयं को साहित्यकार मानते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द
साक्षात्कार – किसी व्यक्ति से प्रश्न पूछकर उसके विचार जानना और लिखना।
संगोष्ठी – किसी विषय पर विशेषज्ञों का चर्चासत्र।
तालीम – शिक्षा।
असहयोग आंदोलन – 1920–22 में गांधीजी द्वारा चलाया गया आंदोलन, जिसमें अंग्रेजी सरकार का साथ न देने को कहा गया।
लौकिक / पारलौकिक प्रेम – सांसारिक प्रेम / ईश्वर के प्रति प्रेम।
भाषा अध्ययन
ज्वार उठना = विचारों की हलचल होना। वाक्य: परीक्षा के परिणाम से पहले मन में विचारों का ज्वार उठ रहा था।
सकते में आना = घबरा जाना, हैरान होना। वाक्य: अचानक तेज आवाज सुनकर सब सकते में आ गए।
मुहावरे:
पाठ के शब्दों को पहचानो – संज्ञा: इनसान, शौक, भाव, घर, धन। क्रिया: मिलना, ठहरना, देना, कहना, बैठना।
संज्ञा से विशेषण: इनसान → इनसानी, शौक → शौकीन, धन → धनवान, घर → घरेलू।
"जरा प्यार से बोलना सीख लीजे" रमेश दत्त शर्मा की एक गजल है। कवि हमें मीठा बोलना, सोचकर बोलना और सही समय पर बोलना सिखाते हैं। साथ ही वे कहते हैं कि हमेशा चुप रहना भी ठीक नहीं; जरूरत हो तो अपनी बात जरूर कहनी चाहिए।
मुख्य बिंदु
कवि: रमेश दत्त शर्मा (जन्म: 1939, जलेसर, एटा, उत्तर प्रदेश; मृत्यु: 2012)।
वे पचास वर्षों तक पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो और टी.वी. से वैज्ञानिक दृष्टिकोण का प्रचार करते रहे; विज्ञान लेखन के लिए अनेक पुरस्कार मिले।
छात्र-जीवन से ही वे मुशायरों में "चचा जलेसरी" नाम से भाग लेने लगे थे।
विधा: गजल (इसके हर दो पंक्तियों के जोड़े को "शेर" कहते हैं)।
वाणी में शहद घोलना, यानी मधुर बोलना सीखना चाहिए।
बोलने से पहले अपने विचारों को खुद तौलना चाहिए।
तू-तड़ाक और तू-तू मैं-मैं के समय अपने आप को टोकना चाहिए।
पटाखे की तरह फटने (गुस्सा करने) के बजाय बात में रोशनी के रंग घोलने चाहिए।
कड़वे वचन काँटे बोते हैं, मीठी बोली फूल उगाती है।
चुभने वाली बात को मोड़ देना चाहिए; पर होंठ सीकर बैठना भी गलत है – जरूरत पर मुँह खोलना चाहिए।
महत्वपूर्ण शब्द
गजल – शेरों से बनी कविता, जिसमें प्रेम, जीवन या सीख की बात होती है।
"मेरे रजा साहब" सुजाता बजाज का संस्मरण है। इसमें लेखिका ने प्रसिद्ध चित्रकार सैयद हैदर रजा के साथ बिताए पलों को याद किया है। रजा साहब सभी धर्मों का आदर करते थे, युवा कलाकारों को बढ़ावा देते थे और हर छोटी बात पर ध्यान देते थे।
मुख्य बिंदु
लेखिका: सुजाता बजाज (जन्म: 1958, जयपुर, राजस्थान), प्रसिद्ध चित्रकार; आजकल पेरिस में रहती हैं। उनके गणेश जी के चित्रों पर आधारित पुस्तक प्रकाशित है।
विधा: संस्मरण।
23 जुलाई की सुबह लेखिका को खबर मिली कि रजा साहब नहीं रहे; उनकी यादें मन में उमड़ आईं।
पिछले फरवरी लेखिका अपनी "गणपति प्रदर्शनी" के लिए दिल्ली गई थीं। सपने में रजा साहब ने मिलने बुलाया, तो वे अस्पताल जाकर उनसे मिलीं और अलविदा कहकर लौटीं।
रजा साहब के स्टूडियो में गणपति की मूर्ति, क्रॉस, बाइबल, गीता, कुरान, माँ का फोटो और गांधीजी की आत्मकथा एक साथ रखे रहते थे।
वे गणेश को भी पूजते थे और हर रविवार चर्च भी जाते थे – यह सर्वधर्मसमभाव है।
पहली मुलाकात जहाँगीर आर्ट गैलरी (मुंबई) में हुई। लेखिका इंटरव्यू लेने गई थीं।
जब पता चला कि लेखिका भी पेंट करती हैं, तो रजा साहब तुरंत टैक्सी से उनके साथ पुणे गए और उनका काम देखा।
उन्होंने कहा, "आपको पेरिस आना है, आपका भविष्य उज्ज्वल है।"
वे हर काम तन्मयता और लगन से करते थे; पेंटिंग बिकने के बाद उसकी पैकिंग में भी रुचि लेते थे।
महत्वपूर्ण शब्द
संस्मरण – किसी व्यक्ति या घटना की याद पर आधारित लेखन।
सर्वधर्मसमभाव – सभी धर्मों को समान आदर देना।
प्रदर्शनी – चित्र या वस्तुएँ लोगों को दिखाने का आयोजन।
तन्मयता – पूरी तरह डूबकर काम करना।
जिज्ञासा – जानने की इच्छा।
भाषा अध्ययन
उद्देश्य और विधेय – वाक्य में जिसके बारे में कहा जाए वह उद्देश्य, और जो कहा जाए वह विधेय।
वाक्य
उद्देश्य
विधेय
रजा साहब हर रविवार चर्च जाते थे।
रजा साहब
हर रविवार चर्च जाते थे
लेखिका दिल्ली पहुँची।
लेखिका
दिल्ली पहुँची
बड़े कलाकार युवाओं को प्रोत्साहन देते हैं।
बड़े कलाकार
युवाओं को प्रोत्साहन देते हैं
सुवचन: "जहाँ चाह, वहाँ राह" – इच्छा पक्की हो तो रास्ता मिल जाता है।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. रजा साहब के स्टूडियो में कौन-कौन सी चीजें रखी रहती थीं?
गणपति की मूर्ति, क्रॉस, बाइबल, गीता, कुरान, माँ का फोटो, गांधीजी की आत्मकथा और भारत से लाई मोगरे की सूखी मालाएँ।
Q2. लेखिका की रजा साहब से पहली मुलाकात कहाँ हुई?
मुंबई की जहाँगीर आर्ट गैलरी में, एक प्रदर्शनी देखते समय।
Q3. पाठ के आधार पर रजा साहब के गुण लिखो।
सभी धर्मों का आदर (सर्वधर्मसमभाव)।
मानव मात्र से प्रेम।
युवा कलाकारों को प्रोत्साहन – लेखिका का काम देखने पुणे तक गए।
जिज्ञासु स्वभाव और छोटी बातों पर ध्यान।
काम के प्रति लगन, पैकिंग तक में रुचि।
Q4. "रजा साहब युवा कलाकारों के सच्चे मार्गदर्शक थे" – स्पष्ट करो।
अनजान युवा चित्रकार का काम देखने तुरंत तैयार हुए।
मुंबई से टैक्सी लेकर पुणे पहुँचे।
काम देखकर पेरिस आने की सलाह दी।
उज्ज्वल भविष्य की बात कहकर आत्मविश्वास बढ़ाया।
Q5. संस्मरण विधा की दो विशेषताएँ इस पाठ के आधार पर लिखो।
यह लेखिका की सच्ची यादों पर आधारित है (23 जुलाई की खबर, दिल्ली की प्रदर्शनी, पुणे यात्रा)।
इसमें किसी महान व्यक्ति के स्वभाव और जीवन की झलक मिलती है।
भाषा आत्मीय है – शीर्षक में ही "मेरे" शब्द अपनापन दिखाता है।
परीक्षा टिप
प्रश्नों में "रजा साहब के गुण" सबसे ज्यादा आते हैं – सर्वधर्मसमभाव, प्रोत्साहन, जिज्ञासा, लगन, ये चार शब्द याद रखो।
"पूर्ण विश्राम" सत्यकाम विद्यालंकार की हास्य-व्यंग्य कहानी है। डॉक्टर लेखक को पूर्ण विश्राम की सलाह देते हैं, तो पति-पत्नी दो दिन जुहू (मुंबई) जाने की योजना बनाते हैं। पर तैयारी, सामान की लंबी सूची और "खिड़की बंद की थी या नहीं" की चिंता में विश्राम की जगह तनाव बढ़ जाता है। कहानी बताती है कि जीवन की आपा-धापी में विश्राम के पल मुश्किल से मिलते हैं।
मुख्य बिंदु
लेखक: सत्यकाम विद्यालंकार (जन्म: 1935, लाहौर, अविभाजित भारत) – सफल संपादक, लेखक और कवि; सरल-सुबोध भाषा, रोचक शैली।
प्रमुख कृतियाँ: "मानसिक शक्ति के चमत्कार", "सफल जीवन" (लेखसंग्रह); "वीर सावरकर", "वीर शिवाजी", "सरदार पटेल", "महात्मा गांधी" (जीवन चरित्र) आदि।
विधा: हास्य-व्यंग्य कहानी।
डॉक्टर ने कहा: कुछ सीरियस नहीं, छुट्टी लेकर बाहर हो आइए; पर विश्राम "पूर्ण" होना चाहिए।
पत्नी ने आधी रात से तैयारी शुरू की; रात दो बजे का अलार्म लगाया और कामों की सूची बनाई।
गैरेज की सूची: हवा भरने की पिचकारी, ट्यूब वाल्व, रबड़ सोल्यूशन, इंजिन ऑयल आदि। मिस्त्री लाने में दिन बीत गया।
सुबह स्टोव बार-बार बुझा, चाय का कार्यक्रम स्थगित हुआ – "वाटरलू जाने से पहले नेपोलियन ने भी ऐसी तैयारी न की होगी।"
साथ में ले जाने की चीजें: मिर्ची का अचार, समाचार पत्र, गुलबंद, बेदिंग सूट, रबर कैप, नोट पेपर-लिफाफे, राइटिंग पैड, चिट्ठियाँ, बिजली के बिल, बीमा नोटिस, छतरी, धूप की क्रीम, समालोचना की किताबें, कविता की कतरनें।
जुहू पर समुद्र में नहाते समय पत्नी को याद आया – बरामदे की खिड़की बंद की थी या नहीं? चिंता में उनके चेहरे का रंग पीला पड़ गया।
दोगुनी रफ्तार से घर लौटे तो खिड़की की चटखनी लगी हुई थी। लेखक का निष्कर्ष: जिस शब्द के साथ "पूर्ण" लग जाए, वह "पूर्ण भयावह" हो जाता है।
महत्वपूर्ण शब्द
विश्राम – आराम।
निरोग – रोग रहित, स्वस्थ।
धौंकनी करना – हवा भरना।
झल्लाना – बहुत बिगड़ जाना, झुँझलाना।
गुलबंद – गले में लपेटने का ऊनी कपड़ा।
व्यंग्य – हँसी-हँसी में किसी कमी पर चोट करना।
भाषा अध्ययन
हाथ बँटाना = सहायता करना। वाक्य: त्योहार की सफाई में सबने हाथ बँटाया।
चेहरे का रंग पीला पड़ना = घबरा जाना। वाक्य: चोरी पकड़ी गई तो उसके चेहरे का रंग पीला पड़ गया।
धुन सवार होना = लगन होना। वाक्य: उसे पहला नंबर लाने की धुन सवार है।
आँखों से ओझल होना = गायब हो जाना।
मुहावरे:
हार – पराजय / गले की माला।
वार – आक्रमण / सप्ताह का दिन।
हल – खेत जोतने का औजार / समाधान।
सीना – छाती / कपड़ा सिलना।
ज्वार – एक अनाज / समुद्र का चढ़ाव।
सुमन – फूल / अच्छा मन।
समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द (एक जैसे उच्चारण, अलग अर्थ):
पर्यायवाची: ऐनक – चश्मा; रात – रात्रि, निशा; अखबार – समाचार पत्र; घर – गृह, सदन।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. डॉक्टर ने लेखक को क्या सलाह दी?
कुछ सीरियस नहीं है; दफ्तर से छुट्टी लेकर बाहर हो आइए। विश्राम आपको पूर्ण निरोग कर देगा, पर विश्राम पूर्ण होना चाहिए।
Q2. जुहू पर पत्नी के चेहरे का रंग पीला क्यों पड़ गया?
उन्हें याद आया कि शायद बरामदे की खिड़की अंदर से बंद नहीं हुई; घर में चोरी की चिंता से वे घबरा गईं।
Q3. जुहू जाते वक्त साथ में ली गई चार वस्तुएँ और गैरेज की सूची की चार चीजें लिखो।
साथ में: मिर्ची का अचार, गुलबंद, बेदिंग सूट, छतरी।
गैरेज की सूची: हवा भरने की पिचकारी, ट्यूब वाल्व, रबड़ सोल्यूशन, इंजिन ऑयल।
Q4. कहानी में हास्य और व्यंग्य कहाँ-कहाँ है?
दो दिन के विश्राम के लिए एक दिन और एक रात की थकाने वाली तैयारी।
नेपोलियन की वाटरलू की तैयारी से तुलना।
विश्राम के लिए बिल, बीमा नोटिस और चिट्ठियाँ साथ ले जाना।
अंत में "पूर्ण" शब्द को "पूर्ण भयावह" कहना।
Q5. संपादक को शिकायत पत्र (औपचारिक पत्र) का प्रारूप लिखो।
दिनांक; प्रति, संपादक का पद और पता।
विषय: साप्ताहिक पत्रिका अनियमित रूप से मिलने के बारे में; संदर्भ (ग्राहक क्रमांक)।
महोदय, – विषय विवेचन: कब से अंक नहीं मिल रहे, क्या असुविधा हुई, क्या अपेक्षा है।
भवदीय/भवदीया, नाम, पता, ई-मेल आईडी।
परीक्षा टिप
संजाल वाली कृति के लिए "साथ ली गई चीजें" और "गैरेज की सूची" अलग-अलग याद रखो; दोनों को मिलाना आम गलती है।
"अनमोल वाणी" में दो भक्त कवियों की रचनाएँ हैं। संत कबीर के दोहे हमें मीठी वाणी बोलने, सात्त्विक भोजन करने और दूसरों में बुराई ढूँढ़ने से पहले अपने भीतर झाँकने की सीख देते हैं। भक्त सूरदास के पद में बालक कृष्ण माँ यशोदा से शिकायत करते हैं कि दूध पीने पर भी उनकी चोटी क्यों नहीं बढ़ रही।
मुख्य बिंदु
संत कबीर (जन्म: लगभग 1398, मृत्यु: लगभग 1518, उ.प्र.) – भक्तिकाल की निर्गुण काव्यधारा के संत कवि; मानवता और समता के प्रबल समर्थक।
कबीर की रचनाएँ: "साखी", "सबद", "रमैनी" – इन तीनों का संग्रह "बीजक" में है।
भक्त सूरदास (जन्म: लगभग 1478, आगरा, उ.प्र.) – वात्सल्य रस के सम्राट; कृष्णभक्ति धारा के कवियों में सर्वोपरि।
सूरदास की कृतियाँ: "सूरसागर", "सूरसारावली", "साहित्यलहरी", "नल-दमयंती" आदि। यह पद "सूरसागर" से लिया गया है।
दोहा 1 का भाव: जैसा भोजन करेंगे वैसा मन बनेगा; जैसा पानी पिएँगे वैसी वाणी होगी।
दोहा 2 का भाव: अहंकार छोड़कर ऐसी वाणी बोलो जो दूसरों को शीतलता दे और खुद को भी शांत रखे।
दोहा 3 का भाव: बुराई ढूँढ़ने निकला तो कोई बुरा नहीं मिला; अपना मन खोजा तो खुद से बुरा कोई नहीं मिला – यानी आत्मपरीक्षण करो।
सूर का पद: कृष्ण पूछते हैं, "मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी?" माँ ने कहा था कि बलराम की चोटी जैसी लंबी-मोटी होगी, पर कितनी बार दूध पीने पर भी वह छोटी है।
कृष्ण शिकायत करते हैं कि माँ बार-बार कच्चा दूध पिलाती है, माखन-रोटी नहीं देती। अंत में सूरदास कृष्ण-बलराम की जोड़ी को चिरंजीवी होने का आशीर्वाद देते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द
दोहा – दो पंक्तियों का छंद।
पद – गाने योग्य भक्ति रचना।
वात्सल्य रस – माता-पिता के बच्चे के प्रति प्रेम का रस।
कबहिं – कब; अजहूँ – अब तक; पचि-पचि – बार-बार।
चोटी – चुटिया, बेणी; काँचौ – कच्चा।
हलधर – बलराम; दोउ – दोनों; चिरजीवौ – लंबी आयु हो।
भाषा अध्ययन
काल परिवर्तन – एक वाक्य को तीनों कालों में बदलो:
वर्तमान काल: कृष्ण दूध पीते हैं।
भूतकाल: कृष्ण ने दूध पिया।
भविष्यकाल: कृष्ण दूध पिएँगे।
वर्तमान: वह मीठी वाणी बोलता है। → भूत: उसने मीठी वाणी बोली। → भविष्य: वह मीठी वाणी बोलेगा।
कहावत: आगे कुआँ पीछे खाई = दोनों तरफ मुसीबत होना।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कविता में इस अर्थ में आए शब्द लिखो: ठंडा, कोई, बलराम, मक्खन।
"धरती का आँगन महके" डॉ. प्रकाश दीक्षित की नई कविता है। कवि चाहते हैं कि कर्म, ज्ञान और विज्ञान से धरती का आँगन महके, खेत धान से खिलें और मनुष्य चाँद-मंगल तक पहुँचे। पर साथ ही वे कहते हैं कि मनुष्य का संबंध विनाशक अस्त्रों से न हो। सदाचार और स्नेह से ही मानवता बचेगी।
मुख्य बिंदु
कवि: डॉ. प्रकाश दीक्षित (जन्म: 1929, इटावा, उ.प्र.; मृत्यु: 2012)। वे आजीवन अध्यापक रहे; "अर्चना", "मणिप्रभा", "ज्ञानार्जन" पत्रिकाओं के संपादक; "अमर उजाला" में पत्रकारिता भी की।
प्रमुख कृतियाँ: "अर्चनांजलि", "मंगलपथ", "दोहावली", "राष्ट्रीय स्वर" (कविता संग्रह) आदि।
विधा: नई कविता।
कर्म, ज्ञान और विज्ञान की ऐसी नदी बहे कि सारे खेत धान से खिल उठें।
हमारी इच्छाएँ आशा की छाँव में मुसकाएँ और कदम विश्वास की राह पर चलें।
शिल्पकला धरती के गले का हार बने; फूल-फलों से हरी-भरी धरती का श्रृंगार हो।
किसी भी यान से चंद्रलोक या मंगल ग्रह पर पहुँचें, पर इनसान का विनाशक अस्त्रों से कोई संबंध न हो।
सदाचार की उजली सलाई (शलाका) मन की सुंदरता को आँकती है।
प्रतिभा का पैमाना बुद्धि की ऊँचाई नापे, और मानवता का मीटर मन की गहराई मापे।
आत्मा को स्नेह के प्रकाश के वस्त्र से ढँककर, सब मिलकर धरती (वसुधा) का जयगान करें।
महत्वपूर्ण शब्द
शलाका – सलाई।
मेधा – बुद्धि।
आँकना – अंदाजा लगाना, मूल्य बताना।
आवृत्त – ढँका हुआ।
वसुधा – पृथ्वी।
सदाचार – अच्छा आचरण।
नई कविता – आधुनिक भाव-बोध वाली, मुक्त शैली की कविता।
भाषा अध्ययन
शरीर – देह, तन, काया
मनुष्य – मानव, इनसान, मनुज
पृथ्वी – धरती, वसुधा, भूमि
छाती – वक्षस्थल, सीना
पथ – मार्ग, राह, रास्ता
समानार्थी शब्द:
पुरुषवाचक: मैं, तुम, वह – हम सब मिलकर धरती का जयगान करें।
निश्चयवाचक: यह, वह – यह धरती हरी-भरी है।
अनिश्चयवाचक: कोई, कुछ – कोई आ रहा है।
संबंधवाचक: जो-सो – जो मेहनत करेगा, वह सफल होगा।
प्रश्नवाचक: कौन, क्या – चाँद पर कौन गया?
निजवाचक: आप, स्वयं, खुद – मैं स्वयं यह काम करूँगा।
सर्वनाम के भेद (संज्ञा के स्थान पर आने वाले शब्द):
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कवि धरती का आँगन किससे महकाना चाहते हैं?
कर्म, ज्ञान और विज्ञान से।
Q2. कविता में इसके लिए प्रयुक्त शब्द लिखो: बुद्धि, पृथ्वी, सलाई।
बुद्धि – मेधा; पृथ्वी – वसुधा (धरती); सलाई – शलाका।
Q3. कवि मानव और विज्ञान के संबंध में क्या चाहते हैं?
मनुष्य विज्ञान से चंद्रलोक और मंगल ग्रह तक पहुँचे।
पर उसका संबंध विनाशक अस्त्रों से न हो।
विज्ञान खेती, कला और जीवन को समृद्ध करे।
प्रगति के साथ मानवता भी बची रहे।
Q4. कविता का केंद्रीय भाव लिखो।
कर्म, ज्ञान और विज्ञान की महत्ता।
प्रकृति, खेती और कला से धरती का श्रृंगार।
विनाशक शस्त्रों से मानवता को बचाना जरूरी।
यह तभी संभव है जब समाज में सदाचार और स्नेह बढ़े।
Q5. "विश्व शांति की माँग सर्वाधिक प्रासंगिक है" – अपने विचार लिखो।
आज कई देशों के पास विनाशक हथियार हैं।
युद्ध से जन, धन और पर्यावरण का भारी नुकसान होता है।
शांति हो तो धन शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास में लगता है।
संवाद, सहयोग और सहनशीलता से ही विश्व शांति संभव है।
परीक्षा टिप
"प्रतिभा का पैमाना" और "मानवता का मीटर" वाली पंक्तियों का भाव (बुद्धि की ऊँचाई और मन की गहराई) जरूर समझो; यह भावार्थ में पूछा जाता है।
"दो लघुकथाएँ" में हरि जोशी की दो छोटी कहानियाँ हैं। पहली लघुकथा "नींव" में एक ईमानदार नया ठेकेदार रिश्वतखोर अधिकारी को रँगे हाथों पकड़वाता है – बुरे काम का नतीजा बुरा होता है। दूसरी लघुकथा "जीभ का वर्चस्व" में घमंडी दाँत विनम्र जीभ से हार जाते हैं – कठोरता से ज्यादा विनम्रता महत्त्वपूर्ण है।
मुख्य बिंदु
लेखक: हरि जोशी (जन्म: 1943, खूड़िया, म.प्र.) – सेवानिवृत्त प्राध्यापक; "गोयनका सारस्वत सम्मान", "वागीश्वरी सम्मान" प्राप्त।
प्रमुख कृतियाँ: "पंखुरिया", "यंत्रयुग", "अखाड़ों का देश", "भारत का राग-अमेरिका के रंग" आदि।
नींव: बहुमंजिला इमारत की नींव बन रही थी। नया ठेकेदार 1 तगारी सीमेंट और 5 तगारी रेत से जुड़ाई करवा रहा था; अधिकारी नाराज हुए।
अगले दिन 1 तगारी सीमेंट और 3 तगारी रेत लगाई, फिर भी अधिकारी गरम हुए और काम बंद करवाने की चेतावनी दी।
अनुभवी ठेकेदार ने बताया कि अधिकारी रिश्वत चाहता है। नया ठेकेदार ईमानदार था; उसने रात में ही उच्च अधिकारी से शिकायत कर दी।
अगले दिन रुपयों का लिफाफा लेते हुए अधिकारी रँगे हाथों पकड़ा गया। उच्च अधिकारी ने कहा – कुछ भ्रष्ट अधिकारियों से पूरा प्रशासन बदनाम होता है। ठेकेदार और उच्च अधिकारी का सार्वजनिक सम्मान हुआ।
जीभ का वर्चस्व: बत्तीस दाँत एकजुट होने के घमंड में जीभ को धमकाते हैं।
जीभ कहती है – ऊपर से सफेद हो पर मन से कपटी हो; तुम अवसरवादी हो, बुढ़ापे में मनुष्य का साथ छोड़ देते हो।
जीभ: तुम्हारा कड़ापन मुँह के भीतर तक सीमित है, मुझमें पूरी दुनिया को प्रभावित करने की क्षमता है। दंत चिकित्सक तुम्हें एक-एक कर बाहर कर देगा, मुझे छुएगा भी नहीं।
अंत में घमंडी दाँतों ने जीभ का लोहा मान लिया।
महत्वपूर्ण शब्द
लघुकथा – बहुत छोटी कहानी जिसमें एक तीखा संदेश हो।
तगारी – बड़ा तसला, घमेला।
कलुषित – अपवित्र, दूषित।
ललक – तीव्र इच्छा।
अवसरवादी – स्वार्थी, मतलबी।
बयान – कथन, चर्चा।
भाषा अध्ययन
लोहा मानना = श्रेष्ठता स्वीकार करना। वाक्य: सबने उसकी गणित की प्रतिभा का लोहा माना।
रँगे हाथ पकड़ना = अपराध करते हुए पकड़ना। वाक्य: पुलिस ने चोर को रँगे हाथ पकड़ा।
पाठ के मुहावरे:
ईंट से ईंट बजाना = पूरी तरह नष्ट कर देना। वाक्य: वीरों ने दुश्मन की ईंट से ईंट बजा दी।
जान में जान आना = चिंता दूर होना। वाक्य: बच्चा मिल गया तो माँ की जान में जान आई।
पानी-पानी होना = बहुत लज्जित होना। वाक्य: झूठ पकड़ा गया तो वह पानी-पानी हो गया।
खिचड़ी पकाना = गुप्त योजना बनाना। वाक्य: दोनों मिलकर कोई खिचड़ी पका रहे हैं।
दिए गए शब्दों से मुहावरे:
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. उचित जोड़ियाँ मिलाओ।
बहुमंजिला – इमारत; अधिकारी – भ्रष्ट; नया ठेकेदार – ईमानदार; सार्वजनिक समारोह – सम्मान।
Q2. पंक्तिबद्ध और एकजुट रहने के कारण दाँतों में क्या गलत परिवर्तन आया?
वे बहुत दुस्साहसी और घमंडी हो गए और अकेली जीभ को धमकाने लगे।
Q3. नये ठेकेदार ने भ्रष्ट अधिकारी को कैसे पाठ पढ़ाया?
पहले उसने काम में सुधार किया, पर अधिकारी संतुष्ट नहीं हुआ।
अनुभवी ठेकेदार से रिश्वत की बात पता चली।
रिश्वत को अपराध मानकर उसने रात में ही उच्च अधिकारी से शिकायत की।
अगले दिन लिफाफा लेते हुए अधिकारी रँगे हाथों पकड़ा गया और उसे दंड मिला।
Q4. जीभ द्वारा दाँतों को दिए गए उत्तर और चेतावनी लिखो।
तुम ऊपर से स्वच्छ पर मन से कपटी हो।
दूसरों को चबाने की ललक वाले जल्दी टूटते हैं।
तुम अवसरवादी हो, बुढ़ापे में साथ छोड़ देते हो।
चेतावनी: दंत चिकित्सक को बुलाऊँ? वह तुम्हें एक-एक कर बाहर कर देगा।
Q5. "विनम्रता सारे सद्गुणों की नींव है" – अपने विचार लिखो।
विनम्र व्यक्ति सबका मन जीत लेता है, जैसे जीभ ने दाँतों को हराया।
घमंडी का सिर हमेशा नीचा होता है।
विनम्रता से सीखने, सुनने और सहयोग की भावना आती है।
ईमानदारी, दया, धैर्य जैसे गुण विनम्रता पर ही टिकते हैं।
परीक्षा टिप
दोनों लघुकथाओं के संदेश अलग-अलग लिखो: "नींव" – बुरे काम का बुरा नतीजा; "जीभ का वर्चस्व" – घमंड नहीं, विनम्रता।
"लकड़हारा और वन" अरविंद भटनागर की एकांकी है। पहले दृश्य में एक गरीब, ईमानदार लकड़हारा चाँदी और सोने की कुल्हाड़ी लेने से मना कर देता है; भगवान खुश होकर शर्त रखते हैं कि वह हरे पेड़ नहीं काटेगा। दूसरे दृश्य में एक हरा-भरा पेड़ लकड़हारे से बात करके उसे पेड़ों का महत्त्व समझाता है। एकांकी मेहनत, ईमानदारी, छोटे परिवार और वन संरक्षण का संदेश देती है।
मुख्य बिंदु
लेखक: अरविंद भटनागर – प्रसिद्ध एकांकीकार; पर्यावरण रक्षा, वृक्षारोपण और वृक्ष संवर्धन पर बल।
विधा: एकांकी (एक अंक का नाटक)। पात्र: लकड़हारा, ग्रामीण के रूप में भगवान, लकड़हारे की पत्नी, एक हरा-भरा पेड़।
पहला दृश्य: पेड़ काटते समय लकड़हारे की कुल्हाड़ी नदी में गिर गई; पानी गहरा था, उसे तैरना नहीं आता था।
ग्रामीण बने भगवान ने नदी से पहले चाँदी की, फिर सोने की कुल्हाड़ी निकाली; लकड़हारे ने दोनों को "मेरी नहीं" कहकर लौटा दिया।
अपनी लोहे की कुल्हाड़ी पाकर वह खुश हुआ। उसका कहना था – मेहनत और ईमानदारी से जो मिले, वही मेरा धन है।
भगवान की शर्त: हरे-भरे पेड़ नहीं काटोगे और लालच में जरूरत से ज्यादा सूखी लकड़ी भी नहीं काटोगे।
दूसरा दृश्य: पत्नी कहती है – घोड़े बेचकर सो रहे हो? जंगल कट रहे हैं, उनकी जगह "सीमेंट के जंगल" खड़े हो रहे हैं।
थककर वह पेड़ की ठंडी छाँव में बैठा, फिर उसी पेड़ पर कुल्हाड़ी उठाई; पेड़ बोल उठा।
पेड़ ने समझाया: मैं शुद्ध हवा, पानी, भोजन देता हूँ; पेड़ कटे तो वन्य पशुओं का घर उजड़ेगा और वर्षा कम होगी। अधिक बच्चे होने से परिवार में दुख आता है।
संदेश: अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मत मारो; हरे पेड़ कभी मत काटो, उन्हें बच्चों की तरह पालो। लकड़हारा हामी भरता है।
महत्वपूर्ण शब्द
एकांकी – एक अंक का छोटा नाटक जिसमें दृश्य, पात्र और संवाद होते हैं।
शर्त – बाजी; किसी बात की पक्की माँग।
बलि – आहुति, भेंट।
सीमेंट के जंगल – पेड़ों की जगह बनती इमारतें।
वृक्ष संवर्धन – पेड़ों की देखभाल करके उन्हें बढ़ाना।
भाषा अध्ययन
घोड़े बेचकर सोना = निश्चिंत होकर सोना। वाक्य: परीक्षा खत्म होते ही वह घोड़े बेचकर सोया।
अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना = खुद अपना नुकसान करना। वाक्य: पढ़ाई छोड़कर उसने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी।
हामी भरना = स्वीकार करना।
मुहावरे:
संज्ञा के भेद: व्यक्तिवाचक (सीता, गंगा), जातिवाचक (नदी, लकड़हारा), भाववाचक (गरीबी, ईमानदारी), द्रव्यवाचक (पानी, सोना), समूहवाचक (सेना, भीड़)।
"सौहार्द-सौमनस्य" में जहीर कुरैशी के नये दोहे हैं। कवि छोटे-बड़े का भेद, नफरत और स्वार्थ छोड़कर प्यार और भाईचारे से रहने की प्रेरणा देते हैं। उनका मानना है कि अनेकता में एकता ही भारत की शान है – धर्म और भाषा अलग होने पर भी हम सब एक हैं।
मुख्य बिंदु
कवि: जहीर कुरैशी (जन्म: 1950, गुना, म.प्र.)। उनकी रचनाएँ अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, पंजाबी आदि भाषाओं में अनूदित हैं। "गोपाल सिंह नेपाली सम्मान" आदि प्राप्त।
प्रमुख कृतियाँ (गजल संग्रह): "एक टुकड़ा धूप", "लेखनी के स्वप्न", "चाँदनी का दुख", "भीड़ में सबसे अलग", "पेड़ तनकर भी नहीं टूटा" आदि।
विधा: नये दोहे।
"वह छोटा, मैं बड़ा" – ये बातें निर्मूल हैं; पैरों की धूल भी उड़कर सिर पर बैठ जाती है।
नफरत ठंडी आग है, उसमें जलना छोड़ो; टूटे दिल को प्यार से जोड़ो।
पौधा नाम (जाति-धर्म) पूछकर फूल नहीं बाँटता; स्वार्थ के "इस्कूल" हमने ही खोले हैं।
धर्म अलग, भाषा अलग, फिर भी हम सब एक हैं; विविध रंग हमें अनेक नहीं करते।
प्यार नकद का काम है – जो प्यार करता है, उसे प्यार मिलता है।
जर्रे-जर्रे में खुदा और कण-कण में भगवान – "जर्रा" और "कण" एक ही हैं।
नफरत से नफरत और प्यार से प्यार बढ़ता है।
भाँति-भाँति के फूल बगिया की शान हैं – कवि को हिंदुस्तान ऐसी ही बगिया लगता है। दीप से दीप तभी जलेंगे जब दीप पास आएँगे।
महत्वपूर्ण शब्द
सौहार्द – मित्रता, भाईचारा; सौमनस्य – मन का मेल, सद्भाव।
निर्मूल – बिना जड़ की, निरर्थक।
स्वारथ – स्वार्थ।
जर्रा – अत्यंत छोटा कण।
सम्हार – सँभाल, सुरक्षा।
भाषा अध्ययन
अव्यय (अविकारी शब्द) – जिनका रूप लिंग, वचन, काल से नहीं बदलता:
क्रियाविशेषण: धीरे, कल, यहाँ, बहुत – वह धीरे चलता है।
संबंधसूचक: के पास, के ऊपर, के बिना – दीप के पास दीप रखो।
समुच्चयबोधक: और, पर, लेकिन, या, इसलिए – धर्म अलग है, लेकिन हम एक हैं।
विस्मयादिबोधक: अरे!, वाह!, हाय! – वाह! कितने सुंदर फूल हैं!
विलोम जोड़ियाँ (कविता से): छोटा × बड़ा, नफरत × प्यार, सिर × पैर, अलग × एक।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कविता में इस अर्थ में आए शब्द लिखो: दीपक, पुष्प, तिरस्कार, प्रेम।
"खेती से आई तब्दीलियाँ" पं. जवाहरलाल नेहरू का अपनी बेटी इंदिरा को लिखा एक पत्र है। इसमें नेहरू जी बताते हैं कि शिकार पर जीने वाला आदिम मनुष्य जब खेती करने लगा, तो कामों का बँटवारा हुआ, गाँव-कस्बे बने, जीवन आरामदायक हुआ और अतिरिक्त अनाज जमा होने लगा। इसी से अमीर-गरीब का भेद और बचत की प्रणाली शुरू हुई।
मुख्य बिंदु
लेखक: पं. जवाहरलाल नेहरू (जन्म: 1889, इलाहाबाद, उ.प्र.; मृत्यु: 27 मई 1964, नई दिल्ली) – स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री; चिंतक, वक्ता, लेखक; विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास को प्रोत्साहन दिया।
प्रमुख कृतियाँ: "एक आत्मकथा", "दुनिया के इतिहास का स्थूल दर्शन", "भारत की खोज", "पिता के पत्र पुत्री के नाम" आदि।
विधा: पत्र।
शुरू में हर आदमी शिकार करता था, काम बँटे नहीं थे। सबसे पहले मर्दों और औरतों में काम बँटा होगा।
पहली तब्दीली: खेती से काम कई हिस्सों में बँट गए; लोग नये-नये पेशे सीखकर उनमें पक्के हुए।
दूसरी तब्दीली: गाँव और कस्बे बने। पहले चरागाह की खोज में घूमना पड़ता था; खेती के बाद जमीन के पास रहना जरूरी हो गया।
तीसरी तब्दीली: जीवन ज्यादा आराम से कटने लगा, क्योंकि अनाज उगाना दिन भर शिकार करने से आसान था।
एक फसल में जरूरत से ज्यादा अनाज मिलने लगा; लोग अतिरिक्त अनाज जमा करने लगे।
आज लोग अतिरिक्त रुपया बैंक में रखते हैं; जिनके पास बहुत अतिरिक्त रुपया है वे मालदार, जिनके पास कुछ नहीं वे गरीब।
नेहरू जी कहते हैं: आज जो काम नहीं करता उसके पास बचत होती है और जो पसीना बहाता है वह खाली हाथ रहता है – यह बुरा इंतजाम है।
उस जमाने में न रुपये थे न बैंक; जिनके पास बहुत-सी गायें, भेड़ें, ऊँट या अनाज होता, वही अमीर कहलाते।
महत्वपूर्ण शब्द
तब्दीली – परिवर्तन, बदलाव।
कस्बा – गाँव से बड़ी और शहर से छोटी बस्ती।
चरागाह – जानवरों के चरने की जगह।
पेशा – व्यवसाय, रोजगार।
अतिरिक्त – जरूरत से ज्यादा, फालतू।
सबब – कारण।
भाषा अध्ययन
खाली हाथ रहना = पास में कुछ न होना। वाक्य: दिन भर मेहनत करके भी मजदूर खाली हाथ रहा।
सिर खपाना = बहुत बुद्धि लगाना। वाक्य: इस सवाल पर ज्यादा सिर मत खपाओ।
पसीना बहाना = कड़ी मेहनत करना। वाक्य: किसान खेत में पसीना बहाता है।
मुहावरे:
शब्द समूह के लिए एक शब्द: जानवरों को चराने की जगह = चरागाह; जिनके पास बहुत-से अतिरिक्त रुपये हैं = मालदार।
बड़े दुखी लग रहे हो। क्या हुआ?
अरे, रामू के बापू! घोड़े बेचकर सो रहे हो?
तुम्हारे दाने कहाँ हैं?
वाक्य शुद्धि (विरामचिह्न लगाकर):
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. उस जमाने में किसे अमीर कहा जाता था?
जिसके पास बहुत-सी गायें, भेड़ें, ऊँट या अनाज होता था।
Q2. कारण लिखो: खेती के बाद मनुष्य को एक जगह रहना पड़ा।
जमीन को जोत-बोकर वे छोड़ नहीं सकते थे; साल भर खेती का काम चलता था, इसलिए जमीन के पास रहना जरूरी हो गया।
Q3. मनुष्य द्वारा खेती करने पर हुए लाभ (प्रवाह तालिका) लिखो।
काम का बँटवारा, नये पेशे।
गाँव और कस्बे बने।
जीवन आरामदायक हुआ।
अतिरिक्त अनाज जमा होने लगा – बचत की शुरुआत।
Q4. नेहरू जी ने अमीर-गरीब के भेद को "बुरा इंतजाम" क्यों कहा?
बचत का अर्थ अतिरिक्त धन है, जो सबके पास नहीं होता।
आज जो काम नहीं करता उसके पास बचत होती है।
जो पसीना बहाकर मेहनत करता है, वह खाली हाथ रहता है।
इसी अन्याय के कारण दुनिया में इतने गरीब हैं।
Q5. कृषि क्षेत्र में नये प्रयोगों से होने वाले लाभ लिखो।
उन्नत बीज और ड्रिप सिंचाई से कम पानी में अधिक उपज।
जैविक खेती से मिट्टी और स्वास्थ्य की रक्षा।
आधुनिक औजारों से समय और मेहनत की बचत।
किसानों की आय बढ़ती है और देश अन्न में आत्मनिर्भर बनता है।
परीक्षा टिप
"तीन तब्दीलियाँ" क्रम से याद रखो: काम का बँटवारा → गाँव-कस्बे → आराम और अतिरिक्त अनाज (बचत)।
"अंधायुग" डॉ. धर्मवीर भारती के प्रसिद्ध गीतिनाट्य का एक अंश है। कथा महाभारत युद्ध की समाप्ति और श्रीकृष्ण की जीवनयात्रा के अंत के समय की है। वृद्ध के मुख से बताया गया है कि श्रीकृष्ण ने अपना पूरा दायित्व हर मनुष्य को सौंप दिया है। अब मानव का भविष्य उसी के हाथों में है – वह चाहे तो उसे नष्ट करे, चाहे तो जीवन दे।
मुख्य बिंदु
लेखक: डॉ. धर्मवीर भारती (जन्म: 1926, इलाहाबाद, उ.प्र.; मृत्यु: 1997, मुंबई) – आधुनिक हिंदी के प्रमुख लेखक, कवि, नाटककार, सामाजिक विचारक; 1972 में पद्मश्री।
प्रमुख कृतियाँ: "गुनाहों का देवता", "सूरज का सातवाँ घोड़ा", "कनुप्रिया", "ठंडा लोहा", "सातगीत", "बंद गली का आखिरी मकान", "अंधायुग" आदि।
विधा: गीतिनाट्य का अंश (दृश्य काव्य)। इसमें युद्ध और उसके बाद की समस्याओं, आधुनिक जीवन की विभीषिका का चित्रण है।
पात्र: युयुत्सु, अश्वत्थामा, वृद्ध (प्रभु की मृत्यु का साक्षी), संदर्भ में व्याध (शिकारी) और संजय।
युयुत्सु पूछता है: प्रभु के मरण से वधिक को मुक्ति मिली होगी, पर अंधे युग में मानव भविष्य की रक्षा कैसे होगी?
अश्वत्थामा मानता है कि कृष्ण उसके शत्रु थे, फिर भी उनके मस्तक पर दिव्य शांति थी।
वृद्ध बताता है – अंतिम क्षणों में प्रभु ने कहा, "यह मरण नहीं, मात्र रूपांतरण है।"
प्रभु का दायित्व हर मानव मन में रहेगा; उसी के सहारे मनुष्य पिछले ध्वंसों पर नूतन निर्माण करेगा।
वह दायित्व मर्यादायुक्त आचरण, नित नूतन सृजन, निर्भयता, साहस और ममता के रूप में जीवित रहेगा।
अश्वत्थामा पूछता है – क्या हर छोटा व्यक्ति भी जीवन की सार्थकता पा सकता है? वृद्ध कहता है – निश्चय ही! भविष्य तुम्हारे हाथ में है।
महत्वपूर्ण शब्द
गीतिनाट्य – कविता में लिखा गया नाटक।
वधिक / व्याध – वध करने वाला, शिकारी।
कायर – डरपोक।
ध्वंस – विनाश; सृजन – निर्माण।
बर्बर – असभ्य, हिंसक।
आत्मघाती – स्वयं का नाश करने वाला।
दायित्व – जिम्मेदारी।
भाषा अध्ययन
वर्ण विच्छेद – शब्द को उसके व्यंजन और स्वरों में तोड़ना:
मानवीय = म् + आ + न् + अ + व् + ई + य् + अ
सहायता = स् + अ + ह् + आ + य् + अ + त् + आ
मृदुल = म् + ऋ + द् + उ + ल् + अ
वाक्य = व् + आ + क् + य् + अ
शब्द = श् + अ + ब् + द् + अ
व्यवहार = व् + य् + अ + व् + अ + ह् + आ + र् + अ
विलोम: ध्वंस × सृजन, कायर × साहसी, जीवन × मरण।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. कविता में प्रयुक्त पात्रों के नाम लिखो।
युयुत्सु, अश्वत्थामा, वृद्ध (और संदर्भ में व्याध तथा संजय)।
Q2. अंधे युग में प्रभु का एक अंश कैसा रहेगा?
निष्क्रिय, आत्मघाती और विगलित – संजय, युयुत्सु, अश्वत्थामा की भाँति, क्योंकि इनका दायित्व प्रभु ने लिया है।
Q3. श्रीकृष्ण का दायित्व मनुष्य के मन में किस रूप में रहेगा?
मर्यादायुक्त आचरण में।
नित नूतन सृजन में।
निर्भयता और साहस में।
ममता के रस में – इन्हीं से मनुष्य ध्वंस के बाद नया निर्माण करेगा।
Q4. "मरण नहीं है... मात्र रूपांतरण है यह" – भाव स्पष्ट करो।
श्रीकृष्ण का शरीर नष्ट हुआ, पर उनके विचार नष्ट नहीं हुए।
वे हर मानव के कर्तव्य और अच्छे कर्मों में जीवित रहेंगे।
जब भी कोई मर्यादा, साहस और ममता से काम करेगा, प्रभु सक्रिय हो उठेंगे।
इसलिए यह मृत्यु नहीं, एक नया रूप है।
Q5. "मनुष्य का भविष्य उसके हाथों में है" – अपने विचार लिखो।
हमारे कर्म ही भविष्य बनाते हैं।
विज्ञान से हम जीवन बचा भी सकते हैं और विनाश भी कर सकते हैं।
युद्ध, प्रदूषण, नशा – ये मनुष्य के ही बनाए संकट हैं।
सही चुनाव, मेहनत और करुणा से मनुष्य अपना और दुनिया का भविष्य उज्ज्वल बना सकता है।
परीक्षा टिप
इस अंश में भाव ही महत्त्वपूर्ण है: "जिम्मेदारी अब हर मनुष्य की है।" हर उत्तर को इसी विचार से जोड़ो।
"स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक का प्रसिद्ध भाषण है। इसमें टिळक जी स्वराज्य के अधिकार को आत्मा की तरह अजर-अमर बताते हैं। वे कहते हैं कि राजनीति का सच्चा विज्ञान वही है जो स्वशासन तक ले जाए, न कि दासता तक। वे लोगों से प्रतिज्ञा करवाते हैं कि सब संवैधानिक तरीकों से स्वशासन के लिए काम करेंगे।
मुख्य बिंदु
वक्ता: लोकमान्य बाळ गंगाधर टिळक (जन्म: 1856, दापोली, रत्नागिरि, महाराष्ट्र; मृत्यु: 1920, मुंबई)। वे शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध वकील थे।
वे पूर्ण स्वराज की माँग करने वाले पहले बड़े स्वतंत्रता सेनानी थे; जनता ने उन्हें "लोकमान्य" की उपाधि दी।
प्रमुख कृतियाँ: "गीता रहस्य", "वेदकाल का निर्णय", "आर्यों का मूल निवास स्थान" आदि।
विधा: भाषण।
"मैं शरीर से बूढ़ा हूँ, पर उत्साह में जवान हूँ।"
शरीर नष्ट हो सकता है, आत्मा अमर है; वैसे ही होमरूल आंदोलन में सुस्ती दिखे, पर उसकी भावना अविनाशी है।
स्वराज्य की भावना को कोई हथियार काट नहीं सकता, आग जला नहीं सकती, जल भिगो नहीं सकता, हवा सुखा नहीं सकती – और कोई सी.आई.डी. पुलिस पकड़ नहीं सकती।
वे यह घोषणा पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर और नोट्स लेने वाले आशुलिपिकों के सामने भी करते हैं – निर्भयता।
राजनीति-विज्ञान के दो भाग: दैवी (स्वशासन) और राक्षसी (दूसरे राष्ट्र की दासता); राक्षसी भाग का कोई नैतिक औचित्य नहीं।
राजनीति और धर्म शिक्षा के ही अंग हैं।
प्रस्ताव केवल तालियों से नहीं, काम करने की प्रतिज्ञा के साथ पास हो – चाहे मरुभूमि, अज्ञातवास, कष्ट या प्राण ही क्यों न देने पड़ें।
महत्वपूर्ण शब्द
स्वराज्य – अपना राज्य, स्वशासन।
जन्मसिद्ध अधिकार – जन्म से ही मिला अधिकार।
होमरूल – स्वशासन की माँग का एक ऐतिहासिक आंदोलन।
जर्जर – कमजोर; मरुभूमि – बंजर भूमि।
आशुलिपि – संकेत लिपि (शॉर्टहैंड)।
औचित्य – उचित होने की अवस्था; कृतसंकल्प – जिसने पक्का संकल्प किया हो।
संवैधानिक – संविधान के अनुसार।
भाषा अध्ययन
मुहावरा: आँखों से परदा हटाना = वास्तविकता से अवगत कराना। वाक्य: शिक्षक ने अंधविश्वास पर हमारी आँखों से परदा हटा दिया।
सहायक क्रिया – मुख्य क्रिया के साथ आकर काल बताने में मदद करती है: वह पढ़ रहा है। मैं जा चुका था। तुम खेल सकते हो।
पढ़ना → पढ़ाना → पढ़वाना
लिखना → लिखाना → लिखवाना
सुनना → सुनाना → सुनवाना
वाक्य: माँ ने दर्जी से कपड़े सिलवाए।
प्रेरणार्थक क्रिया – कर्ता स्वयं काम न करके दूसरे से करवाता है:
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. गलत विधान सही करके लिखो: (1) टिळक जी शरीर से जवान हैं, पर उत्साह में बूढ़े। (2) प्रांतीय सम्मेलन अंग्रेजों की देन है।
(1) टिळक जी शरीर से बूढ़े हैं, किंतु उत्साह में जवान हैं। (2) प्रांतीय सम्मेलन कांग्रेस की देन है।
Q2. लोकमान्य टिळक जी द्वारा दिया गया नारा लिखो।
"स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं उसे लेकर रहूँगा।"
Q3. जन्मसिद्ध अधिकार (स्वराज्य की भावना) की विशेषताएँ लिखो।
उसे कोई हथियार काट नहीं सकता।
आग जला नहीं सकती, जल भिगो नहीं सकता।
हवा सुखा नहीं सकती।
कोई सी.आई.डी. पुलिस उसे पकड़ नहीं सकती – वह आत्मा की तरह अमर है।
Q4. टिप्पणी लिखो: लोकमान्य टिळक।
जन्म 1856, दापोली (रत्नागिरि); मृत्यु 1920, मुंबई।
शिक्षक, समाजसेवक, वकील और निर्भीक स्वतंत्रता सेनानी।
पूर्ण स्वराज की माँग की; "केसरी" समाचार पत्र से जनजागरण किया।
"गीता रहस्य" जैसे ग्रंथों के लेखक; जनता ने "लोकमान्य" कहा।
Q5. स्कूल के "स्वच्छता अभियान" का वृत्तांत लिखने के मुद्दे लिखो।
स्थल: विद्यालय का प्रांगण और आसपास का परिसर।
काल: दिनांक और समय (जैसे 2 अक्टूबर, सुबह 8 बजे)।
घटना: प्रमुख अतिथि, उद्घाटन, विद्यार्थियों द्वारा सफाई, पौधारोपण, शपथ।
समापन: आभार प्रदर्शन और अभियान का संदेश।
परीक्षा टिप
भाषण वाले पाठ में वक्ता के प्रसिद्ध वाक्य और उपमाएँ (आत्मा अमर है, हथियार काट नहीं सकता) सीधे कृति में पूछे जाते हैं – इन्हें अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करो।
"मेरा विद्रोह" सूर्यबाला की मनोवैज्ञानिक कहानी है। कहानी का नायक (आठवीं का छात्र) पिता की ऊँची अपेक्षाओं, डाँट और मार से दुखी होकर विद्रोही बन जाता है और पिता को नीचा दिखाने के लिए पढ़ाई तक बिगाड़ने लगता है। एक दिन वह पिता को उसके भविष्य की चिंता में अकेले रोते देखता है, तो उसका गुस्सा पिघल जाता है और वह पिता से "संधि" चाहता है।
मुख्य बिंदु
लेखिका: सूर्यबाला (जन्म: 1943, वाराणसी, उ.प्र.) – समकालीन व्यंग्य और कथा साहित्य की प्रमुख लेखिका; 150 से अधिक कहानियाँ, उपन्यास, व्यंग्य रचनाएँ।
"नहीं कुछ इससे बढ़कर" सुमित्रानंदन पंत का गीत है। कवि माँ, किसान, कलाकार-कवि, देश के लिए बलिदान देने वाले वीर और जीवन के अनुभव बाँटने वाले लोगों के कार्य को सबसे बड़ी प्रार्थना मानते हैं। उनका कहना है कि समाज और देश के हित में काम करने वालों की पूजा से बढ़कर कोई पूजा नहीं है।
मुख्य बिंदु
कवि: सुमित्रानंदन पंत (जन्म: 1900, कौसानी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड; मृत्यु: 1977) – प्रकृति सौंदर्य के अनुपम चितेरे और कोमल भावनाओं के कवि।
प्रमुख कृतियाँ: "वीणा", "पल्लव", "गुंजन", "मानसी", "वाणी", "सत्यकाम" आदि।
विधा: गीत। हर पद के अंत में "नहीं प्रार्थना इससे..." (सुंदर, शुभकर, प्रियतर, बढ़कर, शुचितर) की टेक आती है।
माँ: प्रसव वेदना सहकर बच्चे को जन्म देती है, दूध पिलाकर पालती है, पग-पग उस पर न्योछावर होती है – इससे सुंदर प्रार्थना नहीं।
किसान: सर्दी-गर्मी में प्रकृति से जूझकर, पसीना बहाकर मिट्टी को उपजाऊ बनाता है और धरती को हरा-भरा करके अनाज के भंडार भरता है – इससे शुभकर प्रार्थना नहीं।
कलाकार-कवि: भाव की तूलिका से रंग भरकर अरूप को नया रूप देते हैं और रचना में जीवन का स्पंदन भरते हैं – इससे प्रियतर प्रार्थना नहीं।
बलिदानी: सत्यनिष्ठ, जन और भूमि से प्रेम करने वाले लोग मानव के मंगल के लिए प्राण उत्सर्ग कर देते हैं – इससे बढ़कर प्रार्थना नहीं।
लोक (जनता): मधुमक्खी की तरह जीवन का मधुरस चखकर अनुभव जमा करते हैं और संसार के लिए मधु का छत्ता बनाते हैं – इससे पवित्र प्रार्थना नहीं।
महत्वपूर्ण शब्द
जननी – माँ; कृषक – किसान।
स्वेद – पसीना; भू-रज – मिट्टी।
उर्वर – उपजाऊ; शस्य श्यामला – फसलों से हरी-भरी।
तूलि – कूँची, तूलिका; स्पंदन – कंपन।
उत्सर्ग – बलिदान; शोणित रंजित – रक्त से भीगा हुआ।
शुचितर – अधिक पवित्र।
भाषा अध्ययन
मुहावरा: न्योछावर करना = समर्पित करना। वाक्य: सैनिक देश पर अपने प्राण न्योछावर कर देते हैं।
लिंग बदलो: कवि – कवयित्री; माता – पिता; भाई – बहन; लेखक – लेखिका।
वचन बदलो: दुकान – दुकानें; प्रार्थना – प्रार्थनाएँ; अनुभूति – अनुभूतियाँ; कपड़ा – कपड़े; नेता – नेता (रूप नहीं बदलता, जैसे "नेता आए")।
तुलनावाचक शब्द (तर प्रत्यय): प्रिय → प्रियतर; शुचि → शुचितर; सुंदर → सुंदरतर।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. एक शब्द में उत्तर लिखो: (1) धरती को उपजाऊ बनाने वाला (2) अनाज के भंडारों को भरने वाला।
(1) कृषक (किसान) (2) कृषक (किसान)।
Q2. कविता में उल्लिखित मानव के विभिन्न रूप लिखो।
माँ (जननी), किसान (कृषक), कलाकार-कवि, बलिदानी वीर, और लोक (जनता)।
Q3. गीत की विशेषताएँ लिखो।
हर पद एक अलग व्यक्ति के कार्य का गौरव करता है।
हर पद के अंत में "नहीं प्रार्थना इससे..." की टेक है।
तत्सम (संस्कृतनिष्ठ) शब्दों से भरी कोमल भाषा।
कर्म को ही पूजा मानने का संदेश।
Q4. कवि ने किसान के कार्य को "शुभकर प्रार्थना" क्यों कहा है?
किसान सर्दी-गर्मी में प्रकृति से जूझता है।
पसीना बहाकर मिट्टी को उपजाऊ बनाता है।
धरती को फसलों से हरा-भरा कर देता है।
अनाज के भंडार भरकर सबका पेट भरता है – यह सबके लिए शुभ है।
Q5. "कर्म ही सच्ची पूजा है" – कविता के आधार पर समझाओ।
माँ का पालन, किसान का श्रम, कलाकार की रचना, वीर का बलिदान – सब कर्म हैं।
इन कर्मों से समाज और देश का भला होता है।
कवि मंदिर की प्रार्थना से बढ़कर इन्हें मानते हैं।
इसलिए अपना काम ईमानदारी से करना ही ईश्वर की आराधना है।
परीक्षा टिप
टेक के पाँच शब्द (सुंदर, शुभकर, प्रियतर, बढ़कर, शुचितर) सही क्रम में याद रखो; हर एक किस व्यक्ति से जुड़ा है, यह कृति में पूछा जाता है।
आठवीं कक्षा की हिंदी सुलभभारती के अंत में व्याकरण विभाग और उपयोजित लेखन (रचना विभाग) दिए गए हैं। व्याकरण में शब्द भेद (विकारी और अविकारी), वाक्य के प्रकार, क्रिया के काल, कारक, विरामचिह्न, वर्णविच्छेद आदि आते हैं। रचना विभाग में पत्रलेखन (ई-मेल सहित), गद्य आकलन (प्रश्न निर्मिति), वृत्तांत लेखन, कहानी लेखन और विज्ञापन लेखन सिखाया गया है।
मुख्य बिंदु
विकारी शब्द (रूप बदलते हैं): संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया।
संज्ञा के भेद: जातिवाचक, व्यक्तिवाचक, भाववाचक, द्रव्यवाचक, समूहवाचक।
सर्वनाम के भेद: पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, निजवाचक, प्रश्नवाचक, संबंधवाचक।
विशेषण के भेद: गुणवाचक, परिमाणवाचक (निश्चित/अनिश्चित), संख्यावाचक (निश्चित/अनिश्चित), सार्वनामिक।
क्रिया के भेद: सकर्मक, अकर्मक, संयुक्त, प्रेरणार्थक, सहायक।
अविकारी शब्द (अव्यय): क्रियाविशेषण, संबंधसूचक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक।
वाक्य के प्रकार – रचना से: साधारण (सरल), मिश्र, संयुक्त; अर्थ से: विधानार्थक, निषेधार्थक, प्रश्नार्थक, आज्ञार्थक, विस्मयादिबोधक, संदेहसूचक आदि।
काल: वर्तमान, भूत, भविष्य – हर काल के सामान्य, अपूर्ण और पूर्ण रूप।
अन्य बिंदु: मुहावरे-कहावतें, वाक्य शुद्धीकरण, सहायक और प्रेरणार्थक क्रिया पहचानना, कारक, विरामचिह्न, वर्णविच्छेद।
शब्द संपदा: लिंग, वचन, विलोम, पर्यायवाची, शब्द युग्म, अनेक शब्दों के लिए एक शब्द, मराठी-हिंदी समोच्चारित भिन्नार्थक शब्द, उपसर्ग-प्रत्यय, कृदंत-तद्धित।
महत्वपूर्ण शब्द
पत्रलेखन – औपचारिक (कार्यालय, प्राचार्य, संपादक को) और अनौपचारिक (मित्र, रिश्तेदार को)। इस वर्ष से नये प्रारूप में ई-मेल की पद्धति अपेक्षित है।
गद्य आकलन (प्रश्न निर्मिति) – दिए गए गद्यांश पर ऐसे पाँच प्रश्न बनाना जिनके उत्तर एक वाक्य में हों; हर प्रश्न के अंत में प्रश्नचिह्न जरूरी।
वृत्तांत लेखन – घटी हुई घटना या समारोह का विवरण (रिपोर्ताज, इतिवृत्त, अहवाल); घटना, काल और स्थल का उल्लेख जरूरी।
कहानी लेखन – शीर्षक, मुद्दों का विस्तार और कहानी से मिलने वाली सीख।
विज्ञापन – किसी वस्तु, सेवा या कार्यक्रम की आकर्षक, कम शब्दों में सूचना।
भाषा अध्ययन
कारक और उनके चिह्न (परसर्ग):
कारक
चिह्न
उदाहरण
कर्ता
ने
राम ने पत्र लिखा।
कर्म
को
माँ ने बच्चे को बुलाया।
करण
से, के द्वारा
वह कलम से लिखता है।
संप्रदान
के लिए, को
यह उपहार तुम्हारे लिए है।
अपादान
से (अलग होना)
पेड़ से पत्ता गिरा।
संबंध
का, के, की
यह नेहरू जी का पत्र है।
अधिकरण
में, पर
किताब मेज पर है।
संबोधन
हे!, अरे!
अरे बच्चो! इधर आओ।
अनौपचारिक पत्र/ई-मेल का ढाँचा: दिनांक → संबोधन (प्रिय/आदरणीय) → अभिवादन → विषय विवेचन → समापन (तुम्हारा/तुम्हारी, नाम) → पता/ई-मेल आईडी।
५ महत्वपूर्ण प्रश्न
Q1. विकारी और अविकारी शब्द में अंतर लिखो।
विकारी शब्दों का रूप लिंग, वचन, काल से बदलता है (लड़का–लड़के)। अविकारी शब्दों (अव्यय) का रूप नहीं बदलता (और, धीरे, वाह)।
Q2. "पेड़ से पत्ते गिरे" और "वह चाकू से फल काटता है" – दोनों में "से" किस कारक का है?
पहले में अपादान (अलग होना), दूसरे में करण (साधन)।
Q3. एक काल को तीनों रूपों में लिखो (भूतकाल: लिखना)।
सामान्य भूत: उसने पत्र लिखा।
अपूर्ण भूत: वह पत्र लिख रहा था।
पूर्ण भूत: उसने पत्र लिखा था।
इसी तरह वर्तमान (लिखता है / लिख रहा है / लिख चुका है) और भविष्य बनाओ।
Q4. गद्य आकलन में प्रश्न बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
प्रश्न सार्थक और प्रश्न के रूप में हों।
उत्तर दिए गए गद्यांश में ही हों।
उत्तर एक वाक्य में आ सके।
प्रश्न पूरे परिच्छेद पर आधारित हों और अंत में प्रश्नचिह्न हो।
Q5. वृत्तांत लेखन की चार बातें लिखो।
केवल घटित घटना का वर्णन।
घटना, काल और स्थल का उल्लेख।
घटनाएँ उसी क्रम में, प्रभावी और प्रवाही भाषा में।
केवल आवश्यक बातें; उचित समापन।
परीक्षा टिप
व्याकरण के प्रश्नों में पहले भेद का नाम लिखो, फिर अपना एक छोटा उदाहरण वाक्य – इससे पूरे अंक मिलते हैं।