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हिंदी (सुलभभारती) Hindi (Sulabhbharati)

६ वी · २१ पाठ · २१ पाठांच्या नोट्स तयार

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पाठ

  1. 1मेलानोट्स
  2. 2सैरनोट्स
  3. 3बसंती हवानोट्स
  4. 4उपहारनोट्स
  5. 5जोकरनोट्स
  6. 6(अ) आओ, आयु बताना सीखोनोट्स
  7. 7(ब) महाराष्ट्र की बेटीनोट्स
  8. 8मेरा अहोभाग्यनोट्स
  9. 9नदी कंधे परनोट्स
  10. 10जन्मदिननोट्स
  11. 11सोई मेरी छौना रे !नोट्स
  12. 12उपयोग हमारेनोट्स
  13. 13तूफानों से क्या डरनानोट्स
  14. 14कठपुतलीनोट्स
  15. 15सोना और लोहानोट्स
  16. 16(अ) क्या तुम जानते हो ?नोट्स
  17. 17(ब) पहेलियाँनोट्स
  18. 18स्वास्थ्य संपदानोट्स
  19. 19कागज की थैलीनोट्स
  20. 20टीटू और चिंकीनोट्स
  21. 21वह देश कौन-सा है ?नोट्स

६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 1

मेला

संक्षिप्त सार

"मेला" पहली इकाई का चित्र-पाठ है। चित्र में एक भीड़भरा मेला है – झूले, दुकानें, फेरीवाले और घूमते लोग। मेले में सहायता कक्ष, दमकल, सुरक्षा-चौकी और कूड़ादान जैसी सुविधाएँ भी हैं, और "बूँद-बूँद पानी बचाओ" जैसा संदेश लिखा है। पाठ मेले का अनुभव बताने, सुरक्षा व स्वच्छता समझने और मेहनत करने वाले व्यवसायियों का आदर करने की सीख देता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्रवाचन (पहचानो और बताओ)।
  • मेले में मनोरंजन की चीजें: झूले, खिलौने, खाने-पीने के ठेले, फेरीवाले।
  • सहायता कक्ष – खोए बच्चों या सामान की जानकारी और मदद के लिए।
  • दमकल – आग लगने पर तुरंत मदद के लिए।
  • सुरक्षा-चौकी – पुलिस/सुरक्षाकर्मी, भीड़ में व्यवस्था बनाए रखने के लिए।
  • कूड़ादान – कचरा इधर-उधर न फेंकें, स्वच्छता रखें।
  • संदेश: "बूँद-बूँद पानी बचाओ।"
  • फेरीवाले, सब्जीवाली जैसे व्यवसायियों के सुख-दुख समझकर उनसे आदर से बात करनी चाहिए।
  • मेले में बड़ों का हाथ पकड़कर चलें, भीड़ में सावधान रहें।

महत्वपूर्ण शब्द

  • मेला – किसी अवसर पर लगने वाला बड़ा बाजार और उत्सव।
  • फेरीवाला – घूम-घूमकर सामान बेचने वाला।
  • दमकल – आग बुझाने वाली गाड़ी/दल।
  • सुरक्षा-चौकी – सुरक्षा के लिए बनी चौकी।

भाषा अध्ययन

  • "वाला/वाली" प्रत्यय: फेरी + वाला = फेरीवाला; सब्जी + वाली = सब्जीवाली; खिलौने + वाला = खिलौनेवाला।
  • संदेश-वाक्य बनाओ: "कचरा कूड़ेदान में डालें।" "भीड़ में धक्का-मुक्की न करें।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. मेले में कौन-कौन सी सुविधाएँ दिखाई गई हैं?

सहायता कक्ष, दमकल, सुरक्षा-चौकी और कूड़ादान।

Q2. सहायता कक्ष का क्या उपयोग है?

खोए हुए बच्चों या सामान की जानकारी देने और जरूरतमंदों की मदद करने के लिए।

Q3. मेले में सुरक्षा के लिए हमें क्या करना चाहिए?

  • बड़ों के साथ रहें, उनका हाथ पकड़कर चलें।
  • अजनबियों की बातों में न आएँ।
  • खो जाने पर सहायता कक्ष जाएँ।
  • भीड़ में धक्का-मुक्की न करें।

Q4. "बूँद-बूँद पानी बचाओ" का अर्थ समझाओ।

पानी बहुत कीमती है; थोड़ी-थोड़ी बचत से भी बहुत पानी बचता है।

Q5. तुम्हारे देखे किसी मेले का अनुभव चार वाक्यों में लिखो।

पिछले साल मैं गाँव के मेले में गया/गई। वहाँ बड़े झूले और खिलौनों की दुकानें थीं। मैंने गुब्बारा खरीदा और जलेबी खाई। भीड़ बहुत थी, इसलिए मैं माँ का हाथ पकड़कर चला/चली। (अपना अनुभव लिखो)

परीक्षा टिप

चित्र-वर्णन में पहले "क्या दिख रहा है", फिर "कौन क्या कर रहा है" और अंत में "चित्र का संदेश" लिखो।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 2

सैर

संक्षिप्त सार

"सैर" एक चित्र-पाठ है। इसमें यात्रा के चार स्थान दिखाए गए हैं – बस स्थानक, बंदरगाह, हवाई अड्डा और रेल स्थानक। हर जगह यात्रियों के लिए सूचना-फलक और संदेश लिखे हैं, जैसे "आपकी यात्रा सुखद हो", "धूम्रपान मना है", "अपने सामान का ध्यान रखें"। पाठ आवागमन के साधनों, सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता और यात्रा के नियमों की जानकारी देता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्र-पाठ (देखो, समझो और बताओ)।
  • बस स्थानक: "आपकी यात्रा सुखद हो"; प्लेटफॉर्म (फलाट) क्र. 1, 2, 3; स्वच्छतागृह; पीने का पानी; "राष्ट्रीय संपत्ति, हमारी संपत्ति"।
  • बंदरगाह: "स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत"; "पानी में कचरा न डालें"।
  • हवाई अड्डा (अंतरराष्ट्रीय): "धूम्रपान मना है"; "लावारिस वस्तुओं को हाथ न लगाएँ"।
  • रेल स्थानक: टिकट घर, आरक्षण, "अपने सामान का ध्यान रखें"।
  • आवागमन के मार्ग तीन प्रकार के हैं: जल मार्ग (नाव, जहाज), थल मार्ग (बस, रेल, कार), वायु मार्ग (हवाई जहाज, हेलिकॉप्टर)।
  • यात्रा में महिलाओं और वृद्धों की सहायता करनी चाहिए।
  • सार्वजनिक स्थल हमारी राष्ट्रीय संपत्ति हैं; उन्हें साफ रखना हमारा कर्तव्य है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • सैर – घूमना, यात्रा।
  • स्थानक – स्टेशन।
  • बंदरगाह – जहाजों के ठहरने का स्थान।
  • आरक्षण – पहले से सीट पक्की करना।
  • लावारिस – जिसका कोई मालिक न दिखे।
  • आवागमन – आना-जाना।

भाषा अध्ययन

  • सूचना-वाक्य (निषेधार्थक): "धूम्रपान मना है।" "पानी में कचरा न डालें।" "लावारिस वस्तुओं को हाथ न लगाएँ।"
  • अन्य सूचना-वाक्य बनाओ: "कतार में खड़े रहें।" "टिकट लेकर ही यात्रा करें।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. पाठ में यात्रा के कौन-से चार स्थान दिखाए गए हैं?

बस स्थानक, बंदरगाह, हवाई अड्डा और रेल स्थानक।

Q2. हवाई अड्डे पर कौन-सी सूचनाएँ लिखी हैं?

"धूम्रपान मना है।" और "लावारिस वस्तुओं को हाथ न लगाएँ।"

Q3. आवागमन के साधनों का वर्गीकरण करो।

  • जल मार्ग: नाव, जहाज।
  • थल मार्ग: बस, रेल, कार, बैलगाड़ी।
  • वायु मार्ग: हवाई जहाज, हेलिकॉप्टर।

Q4. लावारिस वस्तुओं को हाथ क्यों नहीं लगाना चाहिए?

उनमें खतरनाक चीज (जैसे बम) हो सकती है; ऐसी वस्तु दिखे तो सुरक्षाकर्मी को बताना चाहिए।

Q5. सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखने के लिए हम क्या कर सकते हैं?

  • कचरा कूड़ेदान में डालें।
  • दीवारों पर न थूकें, न लिखें।
  • पानी में कचरा न फेंकें।
  • दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करें।

परीक्षा टिप

सूचना-फलकों के वाक्य ज्यों के त्यों याद रखो; "कहाँ लिखा है" वाले प्रश्न इन्हीं पर पूछे जाते हैं।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 3

बसंती हवा

संक्षिप्त सार

"बसंती हवा" केदारनाथ अग्रवाल की प्रसिद्ध कविता है। इसमें बसंत ऋतु की हवा स्वयं अपना परिचय देती है। वह मस्तमौला, निडर और अपनी धुन में रहने वाली है – कभी महुए के पेड़ पर चढ़ती है, कभी आम पर, कभी गेहूँ के खेत में लहरें उठाती है, अलसी और सरसों को हिलाती-झुलाती है। कविता में हवा की अठखेलियों (चंचल खेलों) का मस्ती भरा वर्णन है।

मुख्य बिंदु

  • कवि: केदारनाथ अग्रवाल (जन्म: 1 अप्रैल 1911; मृत्यु: 22 जून 2000) – प्रगतिशील कवि।
  • रचनाएँ: "देश-देश की कविताएँ", "अपूर्वा", "आग का आईना", "पंख और पतवार", "पुष्पदीप" आदि।
  • विधा: कविता। टेक: "हवा हूँ, हवा मैं बसंती हवा हूँ।"
  • हवा स्वयं को बावली (अपनी धुन में), मस्तमौला, निडर और अजब मुसाफिर कहती है; उसे किसी बात की फिकर नहीं।
  • वह जिधर चाहती है, उधर घूमती है।
  • वह महुए के पेड़ पर चढ़कर थपाथप मचाती है, फिर धम्म से गिरती है।
  • आम के पेड़ पर चढ़कर उसे झकोरा देती है और कान में "कू" कर देती है।
  • गेहूँ के हरे खेतों में पहुँचकर खूब लहरें मारती है और पहर-दो पहर नहीं, अनेक पहर वहीं रहती है।
  • सिर पर कलसी लिए खड़ी अलसी को हिलाया-झुलाया, पर कलसी नहीं गिरी; इस हार से उसने सरसों को न हिलाया, न झुलाया।
  • संदेश: हवा प्रकृति का उपहार और जीवन का आधार है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • बावली – सीधी-सी, अपनी धुन में रहने वाली।
  • मस्तमौला – मनमौजी।
  • फिकर – चिंता।
  • महुआ – एक प्रकार का वृक्ष।
  • झकोरा – झोंका।
  • पहर – प्रहर (लगभग तीन घंटे का समय)।
  • अलसी, सरसों – तिलहन (तेल वाले बीज) के प्रकार।
  • कलसी – छोटी गगरी (यहाँ अलसी के फूल-बीज का गोल शीर्ष)।

भाषा अध्ययन

  • लययुक्त (तुकांत) शब्द: महुआ – बटुआ; हवा – दवा; बावली – सावली; अलसी – कलसी; सरसों – बरसों।
  • ध्वन्यात्मक शब्द: थपाथप, धम्म, कू।
  • मानवीकरण: कविता में हवा मनुष्य की तरह चढ़ती, भागती, बोलती है।
  • रिक्त स्थान: (1) नहीं कुछ फिकर है। (2) गिरी धम्म से फिर, चढ़ी आम ऊपर। (3) वहाँ, गेहुँओं में, लहर खूब मारी। (4) हिलाया-झुलाया गिरी पर न कलसी।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बसंती हवा अपने बारे में क्या-क्या बताती है?

वह बावली, मस्तमौला, निडर और अजब मुसाफिर है; उसे कोई फिकर नहीं, जिधर चाहे उधर घूमती है।

Q2. हवा ने आम के पेड़ के साथ क्या किया?

आम पर चढ़कर उसे झकोरा दिया और कान में "कू" कर दिया।

Q3. गेहूँ के खेत में हवा ने क्या किया?

  • हरे खेतों में पहुँचकर खूब लहरें मारीं।
  • अनेक पहर तक उसी में रही।
  • गेहूँ की बालियाँ लहराने लगीं।

Q4. अलसी और सरसों के प्रसंग में हवा की "हार" क्या थी?

अलसी को बहुत हिलाया-झुलाया, पर उसकी कलसी नहीं गिरी; इसी हार के कारण उसने सरसों को न हिलाया, न झुलाया।

Q5. "हवा प्रकृति का उपहार, यही है जीवन का आधार" – समझाओ।

  • साँस लेने के लिए हवा जरूरी है।
  • पेड़-पौधे और सभी जीव हवा से जीवित हैं।
  • प्रदूषण (प्लास्टिक, धुआँ) से हवा को बचाना हमारा कर्तव्य है।

परीक्षा टिप

कविता की ध्वन्यात्मक और तुकांत शब्द-जोड़ियाँ याद रखो; "रिक्त स्थान भरो" और "लययुक्त शब्द लिखो" प्रश्न इसी पर आते हैं।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 4

उपहार

संक्षिप्त सार

"उपहार" एक परी-कथा है। गरीब लड़का ऋत्विक पुस्तक मेला देखने और पुस्तकें खरीदना चाहता था, पर माँ ने मना कर दिया। उदास ऋत्विक को एक परी मिली, जिसने कहा कि परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर वह उसकी मदद करेगी। रास्ते में मिली लाल मखमली पोटली ऋत्विक ने बिना खोले उसके असली मालिक (राहगीर) को लौटा दी – यही उसकी ईमानदारी की परीक्षा थी। इनाम में मिली पोटली से ढेर सारी पुस्तकें निकलीं और ऋत्विक ने गाँव में पुस्तकालय खोला।

मुख्य बिंदु

  • विधा: कहानी। संदेश: लक्ष्य पाने के लिए रुचि और लगन जरूरी है; ईमानदारी चरित्र निर्माण की नींव है।
  • ऋत्विक गरीब था; गाँव के पास "पुस्तक मेला" लगा था।
  • माँ ने कहा – घर में कोई बड़ा नहीं, अकेले इतनी दूर कैसे जाओगे; यह जिद छोड़ दो।
  • उदास होकर वह पेड़ के नीचे बैठा; तेज रोशनी में सुनहरे पंखों वाली परी दिखी।
  • परी ने कहा – मदद तभी करूँगी, जब तुम मेरी परीक्षा में उत्तीर्ण हो जाओगे; परीक्षा क्या है, यह नहीं बताया।
  • रास्ते में लाल मखमली पोटली मिली; ऋत्विक ने सोचा – जो मेरी नहीं, उसे खोलने का मुझे हक नहीं।
  • एक राहगीर ने पोटली के बारे में पूछा; ऋत्विक ने पहचान पूछी (लाल रंग, सुनहरे रंग में परी का चित्र) और फिर पोटली लौटा दी।
  • अगले दिन परी ने वही पोटली इनाम में दी – "वह राहगीर भी मैं ही थी; ईमानदार व्यक्ति के जीवन में किसी वस्तु की कमी नहीं होती।"
  • माँ ने पोटली खोली तो वह कई गुना बड़ी हो गई और सुंदर पुस्तकें निकल आईं।
  • ऋत्विक ने बहन कृतिका की सहायता से मित्रों के लिए पुस्तकालय खोला; गाँव उसे "पुस्तक मित्र" कहने लगा।
  • सपने में पुस्तकें बोलीं – बड़े होकर हमें भूल तो नहीं जाओगे? ऋत्विक ने कहा – तुम ही मेरी साथी हो; उसने बड़ा पुस्तक भंडार खोलने का निश्चय किया।

महत्वपूर्ण शब्द

  • उपहार – भेंट, इनाम।
  • राहगीर – पथिक, रास्ते पर चलने वाला।
  • पोटली – छोटी थैली।
  • मखमली – मखमल (नरम कपड़े) की।
  • हैरान – चकित।
  • ध्येय – लक्ष्य।

भाषा अध्ययन

  • संज्ञा – किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान या भाव का नाम: परी, ऋत्विक (व्यक्तिवाचक), ढेर (समूहवाचक), ईमानदारी (भाववाचक), दूध (द्रव्यवाचक)।
  • मुहावरे: आँखें भर आना = भावुक/दुखी होना; तय करना = निश्चय करना; चकित होना = आश्चर्य करना; आँख लगना = नींद आ जाना।
  • समानार्थी: तेज = प्रखर; सखा = मित्र; वृक्ष = पेड़; नयन = आँख; जननी = माँ; भगिनी = बहन।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. किसने किससे कहा?

  • "तुम यहाँ उदास क्यों बैठे हो?" – परी ने ऋत्विक से।
  • "मेरी पोटली गिर गई है रास्ते में।" – राहगीर (परी) ने ऋत्विक से।
  • "और कोई पहचान बताओ।" – ऋत्विक ने राहगीर से।
  • "नहीं-नहीं, अब तो तुम ही मेरी साथी हो, मित्र हो।" – ऋत्विक ने पुस्तक से (सपने में)।

Q2. ऋत्विक ने पोटली क्यों नहीं खोली?

उसने सोचा – जब यह मेरी नहीं है तो इसे खोलने का मुझे हक नहीं है।

Q3. परी ने ऋत्विक की कौन-सी परीक्षा ली और कैसे?

  • ईमानदारी की परीक्षा।
  • खुद राहगीर बनकर पोटली रास्ते में गिराई।
  • ऋत्विक ने पोटली बिना खोले, पहचान पूछकर लौटा दी।
  • इसलिए वह उत्तीर्ण हुआ और इनाम मिला।

Q4. गाँव वाले ऋत्विक को "पुस्तक मित्र" क्यों कहने लगे?

उसने बहन कृतिका की मदद से पुस्तकालय खोला, जहाँ सब बच्चे मनपसंद पुस्तकें पढ़ने लगे; पुस्तकें ही उसके जीवन का ध्येय बन गईं।

Q5. "सच्चाई में ही सफलता निहित है" – कहानी के आधार पर समझाओ।

ऋत्विक ने ईमानदारी दिखाई, लालच नहीं किया; इसी कारण उसे मनचाही पुस्तकें मिलीं और उसका सपना पूरा हुआ।

परीक्षा टिप

"किसने किससे कहा" प्रश्न में याद रखो कि राहगीर और परी एक ही हैं – उत्तर में यह बात लिखने से पूरे अंक मिलते हैं।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 5

जोकर

संक्षिप्त सार

"जोकर" एक चित्र-कथा है, जिसमें सर्कस के जोकर के कामों के द्वारा मुहावरे और कहावतें सिखाई गई हैं। जोकर जान पर खेलकर कलाबाजियाँ दिखाता है, ठहाके लगाकर लोगों को हँसाता है, धन्यवाद मिलने पर फूला नहीं समाता और गाना न आने पर गला खराब होने का बहाना करता है। पाठ बताता है कि मुहावरे-कहावतों से कम शब्दों में बड़ी बात कही जा सकती है – "गागर में सागर भरना"।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्र-कथा (मुहावरे और कहावतें)।
  • जोकर अपनी जान पर खेलकर कलाबाजियाँ दिखाता है।
  • जोकर झूठ-मूठ का ठहाका लगाकर लोगों को हँसाता है।
  • उचित प्रतिसाद न मिलने पर जोकर मन मसोसकर रह गया।
  • खेल समाप्त होने पर कुछ बच्चों के धन्यवाद कहने पर वह फूला नहीं समाया।
  • एक बच्चे को अपनी नकल करते देखकर जोकर दंग रह गया।
  • शोर मचाने वाले बच्चों को जोकर आँखें दिखा रहा था।
  • मौका मिलने पर जोकर दूसरे कलाकारों के करतबों का श्रेय लेता है – "गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास"।
  • गाना आता नहीं, तो कहता है गला खराब है – "नाच न जाने, आँगन टेढ़ा"।
  • हँसना स्वास्थ्य के लिए अच्छा है; हमें सदैव प्रसन्न रहना चाहिए।

महत्वपूर्ण शब्द

  • मुहावरा – ऐसा वाक्यांश जिसका अर्थ शब्दों के सामान्य अर्थ से अलग, विशेष होता है।
  • कहावत (लोकोक्ति) – अनुभव पर आधारित पूरा वाक्य, जो सीख देता है।
  • कलाबाजी – शरीर के करतब।
  • प्रतिसाद – प्रतिक्रिया, जवाब।
  • श्रेय – किसी काम का यश।

भाषा अध्ययन

मुहावरे और अर्थ:

  • जान पर खेलना = प्राणों की परवाह न करना।
  • ठहाका लगाना = जोर से हँसना।
  • मन मसोसकर रह जाना = कुछ न कर पाना।
  • फूला न समाना = अत्यधिक खुश होना।
  • दंग रहना = आश्चर्यचकित होना।
  • आँखें दिखाना = गुस्सा होना।

कहावतें और अर्थ:

  • गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास = अवसरवादी होना।
  • नाच न जाने, आँगन टेढ़ा = अपना दोष छिपाने के लिए दूसरों में कमी बताना।
  • घर की मुर्गी दाल बराबर = घर की चीज की कद्र न होना।
  • अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत = समय निकलने पर पछताना बेकार है।
  • "हाथ" से मुहावरे: हाथ बँटाना, हाथ मलना, हाथ धो बैठना, हाथ पीले करना।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. जोकर लोगों को कैसे हँसाता है?

झूठ-मूठ का ठहाका लगाकर और जान पर खेलकर कलाबाजियाँ दिखाकर।

Q2. जोकर कब फूला नहीं समाया?

खेल समाप्त होने पर जब कुछ बच्चों ने उसे धन्यवाद कहा।

Q3. "नाच न जाने, आँगन टेढ़ा" कहावत जोकर पर कैसे लागू होती है?

  • जोकर को गाना नहीं आता।
  • पर वह अपनी कमी नहीं मानता।
  • बहाना करता है कि गला खराब है।
  • यानी अपना दोष छिपाकर दूसरी बात पर डालता है।

Q4. मुहावरों का वाक्य में प्रयोग करो: दंग रहना, आँखें दिखाना।

  • जादूगर का खेल देखकर सब दंग रह गए।
  • शोर करने पर शिक्षक ने बच्चों को आँखें दिखाईं।

Q5. "गागर में सागर भरना" का अर्थ बताओ और मुहावरों से इसका संबंध समझाओ।

कम शब्दों में बहुत बड़ी बात कहना; मुहावरे-कहावतें थोड़े शब्दों में गहरा अर्थ देते हैं।

परीक्षा टिप

हर मुहावरे का अर्थ और एक अपना वाक्य तैयार रखो; परीक्षा में "अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग करो" जरूर पूछा जाता है।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 6

(अ) आओ, आयु बताना सीखो

संक्षिप्त सार

"आओ, आयु बताना सीखो" एक मजेदार गणितीय खेल है। पाँच आसान चरणों से तुम किसी मित्र की आयु "जादू" की तरह बता सकते हो – आयु और अगले वर्ष की आयु जोड़ो, 5 से गुणा करो, जन्मवर्ष का इकाई अंक जोड़ो, 5 घटाओ और बाईं ओर के दो अंक पढ़ लो।

मुख्य बिंदु

  • विधा: आकलन / खेल (गणितीय पहेली)।
  • चरण 1: मित्र से कहो – वर्तमान आयु में अगले वर्ष की आयु जोड़ो।
  • चरण 2: इस योगफल को 5 से गुणा करो।
  • चरण 3: गुणनफल में अपने जन्मवर्ष का इकाई अंक जोड़ो।
  • चरण 4: प्राप्त योगफल में से 5 घटाओ।
  • चरण 5: जो संख्या आए, उसकी बाईं ओर के दो अंक ही मित्र की आयु है।
  • उदाहरण (आयु 10 वर्ष, जन्मवर्ष 2004): 10 + 11 = 21; 21 × 5 = 105; 105 + 4 = 109; 109 − 5 = 104 → बाईं ओर के दो अंक 10 = आयु।
  • इस खेल से परिजनों, मित्रों को आश्चर्यचकित कर सकते हो।
  • ऐसे खेल गणित को रोचक बनाते हैं और सोचने की क्षमता बढ़ाते हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • आयु – उम्र।
  • योगफल – जोड़ने से मिला उत्तर।
  • गुणनफल – गुणा करने से मिला उत्तर।
  • इकाई अंक – संख्या का सबसे दाईं ओर का अंक (2004 में 4)।
  • आकलन – समझ, अनुमान।

भाषा अध्ययन

  • गणित के हिंदी शब्द: जोड़ (+), घटाना (−), गुणा (×), भाग (÷); योगफल, अंतर, गुणनफल, भागफल।
  • क्रम-सूचक शब्द: पहले, फिर, उसके बाद, अंत में।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. आयु बताने के खेल के पाँच चरण क्रम से लिखो।

आयु + अगले वर्ष की आयु → × 5 → + जन्मवर्ष का इकाई अंक → − 5 → बाईं ओर के दो अंक।

Q2. 12 वर्ष के मित्र (जन्मवर्ष 2013) के लिए खेल करके दिखाओ।

12 + 13 = 25; 25 × 5 = 125; 125 + 3 = 128; 128 − 5 = 123 → बाईं ओर के दो अंक 12 = आयु।

Q3. जन्मवर्ष 2004 का इकाई अंक क्या है?

4।

Q4. गुणनफल किसे कहते हैं?

दो संख्याओं का गुणा करने पर मिलने वाला उत्तर।

Q5. ऐसे गणितीय खेलों से क्या लाभ होता है?

गणित मजेदार लगता है, हिसाब तेज होता है और सोचने की क्षमता बढ़ती है।

परीक्षा टिप

अपनी आयु और जन्मवर्ष लेकर खेल एक बार खुद हल करो; चरणों का क्रम अपने आप याद हो जाएगा।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 7

(ब) महाराष्ट्र की बेटी

संक्षिप्त सार

"महाराष्ट्र की बेटी" एक चित्र-पाठ (अंतर बताओ) है। इसमें महाराष्ट्र की पारंपरिक वेशभूषा में सजी एक लड़की के दो एक जैसे दिखने वाले चित्र हैं – नौवारी साड़ी, सिर पर पल्लू, माथे पर बिंदी, गहने, हाथों में चूड़ियाँ और पैरों में चप्पल। बच्चों को दोनों चित्रों को ध्यान से देखकर उनमें अंतर ढूँढ़ने हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्र – अंतर बताओ (निरीक्षण)।
  • दोनों चित्रों में लड़की महाराष्ट्र के पारंपरिक पहनावे में है।
  • पहले चित्र में साड़ी गुलाबी है, दूसरे में हरी – साड़ी का रंग सबसे बड़ा अंतर है।
  • गहनों, पल्लू, चूड़ियों और पैरों जैसी छोटी बातों में भी अंतर ढूँढ़ने हैं – ध्यान से देखना जरूरी है।
  • पहनावा: नौवारी साड़ी, पल्लू, नथ, बिंदी, हार, चूड़ियाँ।
  • भारत के हर राज्य का खानपान, पहनावा और आभूषण अलग है – यही "विविधता में एकता" है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • नौवारी – नौ गज लंबी पारंपरिक मराठी साड़ी।
  • नथ – नाक का गहना।
  • आभूषण – गहने।
  • वेशभूषा – पहनावा।
  • विविधता – अलग-अलगपन।

भाषा अध्ययन

  • अंतर बताने का वाक्य-ढाँचा: "पहले चित्र में ... है, जबकि दूसरे चित्र में ... है।"
  • रंगों के नाम: गुलाबी, हरा, पीला, लाल, बैंगनी, नीला।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. चित्र में लड़की ने कौन-सा पहनावा पहना है?

महाराष्ट्र की पारंपरिक नौवारी साड़ी, गहने और चूड़ियाँ।

Q2. दोनों चित्रों में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

साड़ी का रंग – पहले में गुलाबी, दूसरे में हरा।

Q3. महाराष्ट्र के दो पारंपरिक आभूषणों के नाम लिखो।

नथ और मंगलसूत्र/हार (बोरमाळ जैसे गहने)।

Q4. किसी अन्य राज्य के पहनावे के बारे में लिखो।

पंजाब में सलवार-कमीज और पगड़ी; राजस्थान में घाघरा-चोली और रंगीन साफा।

Q5. "विविधता में एकता" का अर्थ लिखो।

भारत के राज्यों का खानपान, पहनावा, भाषा अलग है, फिर भी हम सब एक देश के निवासी हैं।

परीक्षा टिप

अंतर लिखते समय ऊपर से नीचे (सिर → चेहरा → गहने → साड़ी → पैर) क्रम से देखो; कोई अंतर छूटेगा नहीं।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 8

मेरा अहोभाग्य

संक्षिप्त सार

"मेरा अहोभाग्य" चंद्रगुप्त विद्यालंकार का संस्मरण है। फरवरी 1936 में लेखक एक साहित्यिक कार्यक्रम के लिए शांति निकेतन गए, जिसकी अध्यक्षता गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर करने वाले थे। गुरुदेव अस्वस्थ थे, फिर भी उन्होंने लेखक के दल से भेंट की और पंद्रह मिनट की जगह चालीस मिनट बातें कीं। बाद में लेखक को पता चला कि वे उसी कमरे में ठहरे थे, जिसके बरामदे में गुरुदेव ने "गीतांजलि" का अधिकांश भाग लिखा था – इसे वे अपना अहोभाग्य मानते हैं।

मुख्य बिंदु

  • लेखक: चंद्रगुप्त विद्यालंकार (जन्म: 1906) – साहित्य और पत्रकारिता में उल्लेखनीय कार्य। रचनाएँ: "संदेह", "मेरा बचपन", "न्याय की रात", "चंद्रकला", "भय का राज्य", "देव और मानव" आदि।
  • विधा: संस्मरण (स्मरणीय घटना का वर्णन)।
  • फरवरी 1936 – कोलकाता से लगभग एक दर्जन हिंदीवालों का दल शांति निकेतन गया।
  • दल को अशोक वृक्षों के सघन उपवन के बीच बने सुंदर अतिथि-भवन में ऊपर की मंजिल पर ठहराया गया; बरामदे से सामने घने बकुल वृक्ष दिखते थे।
  • दूसरे दिन पता चला – गुरुदेव का स्वास्थ्य ठीक नहीं, बैठक में नहीं आएँगे; लेखक निराश हुए।
  • डॉक्टर ने केवल पंद्रह मिनट का समय दिया – दर्शन और संक्षिप्त वार्तालाप के लिए; सब खुशी से भर गए।
  • लगभग चार बजे भेंट हुई; चौदह लोगों को देखकर गुरुदेव ने मजाक में कहा – "अब मेरी क्षमता दरबार लगाने की नहीं रही।"
  • गुरुदेव ने बताया – पचास बरस पहले जब उन्होंने कहानियाँ लिखनी शुरू कीं, उनकी कहानियों में ग्रामीण जीवन और ग्रामीण जनता की मनोवृत्ति थी; मनुष्य स्वभाव दुनिया में हर जगह एक-सा है।
  • "काबुलीवाला" के बारे में: वह कल्पना की सृष्टि है; एक काबुलीवाला उनके यहाँ आता था, उससे सोचा कि उसकी भी एक छोटी लड़की होगी।
  • पंद्रह मिनट की जगह चालीस मिनट हो गए; गुरुदेव ने कहा – मुझे स्वयं लोगों से बातचीत में आनंद आता है।
  • लेखक जिस कमरे में ठहरे, उसमें गुरुदेव लंबे समय तक रहे थे और उसके बरामदे में नोबेल पुरस्कार प्राप्त "गीतांजलि" का अधिकांश भाग लिखा गया था।

महत्वपूर्ण शब्द

  • अहोभाग्य – बड़ा सौभाग्य।
  • संस्मरण – स्मरणीय घटना।
  • मध्याह्न – दोपहर।
  • उल्लसित – आनंदित।
  • वार्तालाप – बातचीत।
  • संसर्ग – संगति।
  • बकुल – मौलसिरी (वृक्ष)।
  • मानसिक खाद्य – विचारों को पोषण देने वाली चर्चा।

भाषा अध्ययन

  • सर्वनाम (संज्ञा के बदले आने वाले शब्द): मैं, तू, वह, यह (पुरुषवाचक/निश्चयवाचक), कुछ (अनिश्चयवाचक), क्या (प्रश्नवाचक), जैसा-वैसा (संबंधवाचक), अपने-आप (निजवाचक)।
  • लिंग और वचन बदलो: भैंस – भैंसें / भैंसा – भैंसे; बिल्ली – बिल्लियाँ / बिलाव – बिलाव; घोड़ी – घोड़ियाँ / घोड़ा – घोड़े; नागिन – नागिनें / नाग – नाग; चुहिया – चुहियाँ / चूहा – चूहे।
  • मुहावरा: खुशी का ठिकाना न रहना = बहुत खुश होना; भाव-विभोर होना = भावना में डूब जाना।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. एक वाक्य में उत्तर लिखो।

  • साहित्यिक कार्यक्रम कहाँ होने वाला था? – शांति निकेतन में।
  • गुरुदेव की कहानियों में किसकी मनोवृत्ति के दर्शन होते थे? – ग्रामीण जनता की।
  • संस्मरण में किस कहानी का उल्लेख है? – "काबुलीवाला"।
  • लेखक आनंद विभोर क्यों हुए? – वे उसी कमरे में ठहरे थे, जिसके बरामदे में "गीतांजलि" लिखी गई थी।

Q2. लेखक निराश क्यों हुए और फिर खुश क्यों हुए?

गुरुदेव अस्वस्थ होने से कार्यक्रम में नहीं आ सकते थे, इसलिए निराश हुए; फिर डॉक्टर ने पंद्रह मिनट भेंट की अनुमति दी, तो खुशी का ठिकाना न रहा।

Q3. गुरुदेव ने अपनी कहानियों के बारे में क्या बताया?

  • पचास बरस पहले बांग्ला में ऐसी कहानियाँ नहीं थीं।
  • उनकी कहानियों में ग्रामीण जीवन का वर्णन है।
  • मनुष्य स्वभाव हर जगह एक-सा है, इसलिए वे संसार में किसी को भी भा सकती हैं।
  • "काबुलीवाला" कल्पना की सृष्टि है, एक असली काबुलीवाले से प्रेरित।

Q4. गुरुदेव के स्वभाव की विशेषताएँ लिखो।

विनोदी (मजाक करने वाले), विनम्र, लोगों से बात करने में आनंद लेने वाले, सरल और महान साहित्यकार।

Q5. भारत के दो नोबेल पुरस्कार विजेताओं के नाम लिखो।

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर (साहित्य, "गीतांजलि") और सर सी. वी. रामन (भौतिकी)।

परीक्षा टिप

संस्मरण में तारीख (फरवरी 1936), स्थान (शांति निकेतन) और समय (15 की जगह 40 मिनट) – ये तथ्य उत्तर को पक्का बनाते हैं।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 9

नदी कंधे पर

संक्षिप्त सार

"नदी कंधे पर" प्रभुदयाल श्रीवास्तव की मजेदार कल्पना वाली बाल कविता है। बच्चा सोचता है – अगर उसके बस में होता, तो वह नदी उठाकर अपने घर के सामने ले आता, रोज मित्रों के साथ उसमें नहाता, सबको नदी से मिलवाता, झट से नदी पार कर जाता और शाम को नदी को कंधे पर रखकर वापस वहीं छोड़ आता, जहाँ से लाया था।

मुख्य बिंदु

  • कवि: प्रभुदयाल श्रीवास्तव (जन्म: 4 अगस्त 1944, धरमपुरा, दमोह, मध्यप्रदेश) – कहानी, कविता, व्यंग्य, लघुकथा, गजल के लेखक। रचनाएँ: बुंदेली लघुकथाएँ, लोकगीत, समाचार-पत्रों में बालगीत।
  • विधा: बाल कविता (कल्पना प्रधान)।
  • कविता में काल्पनिक प्रतीकों से नदी के प्रति बच्चे के मनोभाव दिखाए गए हैं।
  • बच्चा नदी को घर के ठीक सामने बहाना चाहता है।
  • मित्रों के साथ कूद-कूदकर, उछल-उछलकर नहाना, तैरना-डुबकी लगाना, इतराना, गाना, मस्ती करना।
  • "नदी आ गई, चलो नहाने!" – सबको आमंत्रित करना और भद्र जनों का नदी से परिचय करवाना।
  • मन होने पर झटपट नदी पार करके उस पार से "मम्मी-मम्मी" चिल्लाना।
  • शाम ढलने पर नदी को कंधे पर रखवाकर वापस उसकी जगह रख आना – यानी प्रकृति की चीज को उसकी जगह लौटाना।

महत्वपूर्ण शब्द

  • बस में होना – अपने अधिकार/शक्ति में होना।
  • इतराना – घमंड या खुशी से नखरे करना।
  • मस्ताना – मस्ती करना।
  • आमंत्रित – बुलाया हुआ।
  • भद्र जन – सज्जन लोग।

भाषा अध्ययन

  • पुनरुक्त शब्द: कूद-कूदकर, उछल-उछलकर, खड़े-खड़े, मम्मी-मम्मी।
  • तुकांत शब्द: लाते – बहाते – नहाते – मस्ताते – करवाते – चिल्लाते – रख आते।
  • संभावना-सूचक वाक्य: "अगर हमारे बस में होता, (तो) नदी उठाकर घर ले आते।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बच्चा नदी को कहाँ लाना चाहता है?

अपने घर के ठीक सामने।

Q2. नदी में बच्चे क्या-क्या करते?

कूद-कूदकर, उछल-उछलकर नहाते; कभी तैरते, कभी डुबकी लगाते; इतराते, गाते और मस्ती करते।

Q3. शाम ढलने पर बच्चा नदी का क्या करता?

नदी उठाकर कंधे पर रखवाता और जहाँ से लाया था, वहीं रख आता।

Q4. कविता की कल्पना तुम्हें कैसी लगी? क्यों?

  • बहुत मजेदार और अनोखी लगी।
  • नदी को कंधे पर उठाना असंभव है, फिर भी बच्चे का मन यह सोचता है।
  • इसमें बच्चों का नदी और पानी के प्रति प्रेम दिखता है।
  • अंत में नदी लौटाना प्रकृति के प्रति आदर दिखाता है।

Q5. अगर तुम्हारे बस में होता, तो तुम क्या घर ले आते? चार वाक्य लिखो।

अगर मेरे बस में होता तो मैं पहाड़ घर ले आता/आती। रोज उस पर चढ़कर सूरज उगते देखता। मित्रों को बुलाकर वहाँ पिकनिक मनाता। शाम को उसे फिर उसकी जगह रख आता। (अपनी कल्पना लिखो)

परीक्षा टिप

कल्पना वाले प्रश्न में "अगर... तो..." से वाक्य शुरू करो और अंत में कोई अच्छी सीख जोड़ो।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 10

जन्मदिन

संक्षिप्त सार

"जन्मदिन" प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव की कहानी है। बबलू पानी और बिजली बहुत बरबाद करता था – घंटों शावर में नहाता, नल खुला छोड़ता, पंखा-बत्ती जलती छोड़ देता। शीला मौसी की बेटी पूजा के जन्मदिन पर बिजली नहीं थी और पानी भी लगभग खत्म था; बबलू प्यास से छटपटाने लगा। उसे पानी-बिजली का मूल्य समझ आ गया। बाद में पता चलता है कि यह सब माँ और मौसी का रचा नाटक था, उसे सबक सिखाने के लिए।

मुख्य बिंदु

  • लेखक: प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव (जन्म: 11 मार्च 1929, खरौना, जौनपुर, उ.प्र.) – बालकहानियाँ, बालनाटक, लेख, रूपक; छह दशकों से साहित्य सृजन।
  • विधा: कहानी। विषय: पानी और बिजली (ऊर्जा) की बचत।
  • गरमी में बबलू आधा घंटा शावर के नीचे रहता, नल भी खोल देता; मंजन करते समय पानी बहता रहता; स्कूल में भी नल खुला छोड़ने पर डाँट खाता।
  • कमरे में न हो तब भी पंखा-कूलर-बल्ब चलते रहते; माँ को बंद करना पड़ता।
  • पानी और बिजली दोनों का भंडार सीमित है।
  • पूजा के जन्मदिन पर: बिजली नहीं, केवल मोमबत्तियाँ; मौसी ने कहा – बिजली कंपनी ने कटौती शुरू की है और टंकी की सफाई के कारण पानी नहीं है।
  • गिलास आधे भरे; बबलू एक घूँट में पानी पी गया, प्यास और भड़क उठी, जग खाली था।
  • उसे गौरैया की खुली चोंच, हाँफता कुत्ता टॉमी याद आए – प्यास का पहली बार अनुभव हुआ।
  • अचानक बिजली आई और अंकल को कूलर में भरा पानी "याद" आया – सब खुश हो गए।
  • घर लौटकर बबलू ने कहा – "अब पानी की एक बूँद भी बरबाद नहीं होगी"; आँगन में पक्षियों के लिए पानी रखने का निश्चय किया।
  • रहस्य: माँ ने फोन पर मौसी को बबलू की आदत बताई थी; यह पूरा नाटक था, जो सफल रहा। बबलू यह कभी नहीं जान पाया।

महत्वपूर्ण शब्द

  • बरबाद – नाश।
  • तमाम – सभी।
  • भंडार – खजाना।
  • सन्नाटा – गहन शांति।
  • कटौती – कमी करना (बिजली/पानी बंद करना)।
  • कामयाब – सफल।
  • अक्षय ऊर्जा – कभी खत्म न होने वाली ऊर्जा (जैसे सौर ऊर्जा)।

भाषा अध्ययन

  • शब्दयुग्म: अड़ोस-पड़ोस, नहाना-वहाना, बारी-बारी, हँसी-खुशी, अच्छा-बुरा।
  • मुहावरा: धमा-चौकड़ी मचाना = धूम मचाना; बाँछें खिल उठना = बहुत प्रसन्न होना; धैर्य जवाब देना = सहनशक्ति खत्म होना।
  • सूचना: बगीचे के फल-फूल तोड़ना मना है।
  • निर्देश: फल, सब्जी लेकर घर आओ।
  • आदेश: "चंदामामा" बालपत्रिका पढ़ो।
  • विनती: अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।
  • अनुरोध: "कृपया हमें अंतरिक्ष के बारे में बताएँ।"
  • वाक्य के प्रकार (उद्देश्य से):
  • विरामचिह्न का महत्त्व: "चलो, मत रुको।" × "चलो मत, रुको।" – अल्पविराम की जगह से अर्थ बदल जाता है।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. बबलू की आदत से कौन परेशान थे और क्यों?

माता-पिता; क्योंकि वह पानी और बिजली बहुत बरबाद करता था।

Q2. शीला मौसी ने बिजली की कटौती का क्या कारण बताया?

गरमी बढ़ने से बिजली कंपनी ने कटौती शुरू की है; आज उनके ब्लॉक की बारी है, फिर दूसरे ब्लॉकों में होगी।

Q3. प्यास के कारण बबलू की स्थिति कैसी बनी?

  • गला सूखने लगा, एक कौर भी गले से नीचे नहीं उतरा।
  • वह छटपटाने और "पानी-पानी" चिल्लाने लगा।
  • पहली बार उसे प्यास का अनुभव हुआ।
  • गौरैया और टॉमी की प्यास याद आई।

Q4. बबलू ने किस बात को कभी नहीं जाना?

कि जन्मदिन की पार्टी में जो कुछ हुआ, वह उसे सबक सिखाने के लिए माँ और शीला मौसी का नाटक था।

Q5. पानी और बिजली बचाने के चार उपाय लिखो।

  • मंजन/नहाते समय नल बंद रखो, बाल्टी से नहाओ।
  • कमरे से निकलते समय पंखा-बत्ती बंद करो।
  • टपकते नल ठीक करवाओ।
  • सौर ऊर्जा का उपयोग करो।

परीक्षा टिप

कहानी के अंत का "नाटक" वाला रहस्य और विचार "सौर ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा" उत्तर में जोड़ो – यह कहानी का मुख्य मोड़ है।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 11

सोई मेरी छौना रे !

संक्षिप्त सार

"सोई मेरी छौना रे !" डॉ. श्रीप्रसाद की एक लोरी है। इसमें माँ अपने नन्हे बच्चे को सुलाते हुए उसके प्रति अपना वात्सल्य (ममता) प्रकट करती है। माँ बच्चे को अपना खिलौना, दीठ-दिठौना और अनोखा सुख कहती है। वह सोने के झूले, रेशम की डोरी, परियों की लोरी, चाँद-सितारों और चाँदनी की कल्पना से बच्चे को मीठी नींद में ले जाती है।

मुख्य बिंदु

  • कवि: डॉ. श्रीप्रसाद (जन्म: 5 जनवरी 1932, पारना, आगरा, उ.प्र.) – विपुल मात्रा में बाल साहित्य का सृजन। रचनाएँ: "खिड़की से सूरज", "आ री कोयल", "गुड़िया की शादी" आदि।
  • विधा: लोरी (बच्चे को सुलाने का गीत)। भाव: माँ का वात्सल्य।
  • टेक: "सोई मेरी छौना रे !"
  • माँ बच्चे को "मेरा खिलौना", "मेरा दीठ-दिठौना" (नजर से बचाने वाला काला टीका), "मेरी प्यारी सलोनी" कहती है।
  • बच्चा सोने के झूले में, रेशम की डोरी पर झूल रहा है।
  • वह परियों की लोरी सुनते हुए मीठे सपनों में खो गया है।
  • चाँद-सितारे जाग रहे हैं, चाँदनी नाच रही है; आँगन में मानो चाँदी के फूल खिले हैं।
  • बच्चा माँ का "अनहोना सुख" (अनोखा सुख) है।
  • माँ गीत गाती है, बच्चा सोता है; बच्चा जागे, खेले या रूठे – माँ हँस-हँसकर मनाती है।
  • माँ उसे खिलौनों की दुनिया की सैर करवाना चाहती है।
  • विचार: "जननी-जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" – माँ और मातृभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • छौना – नन्हा बच्चा।
  • सलोनी – सुंदर।
  • दीठ-दिठौना – नजर न लगे, इसलिए लगाया जाने वाला काला टीका।
  • अनहोना – अनोखा, जो पहले न हुआ हो।
  • आँगनिया – आँगन।
  • वात्सल्य – संतान के प्रति प्रेम।

भाषा अध्ययन

हिंदी-मराठी के समोच्चारित शब्द (अर्थ भिन्नता):

  • कल – हिंदी: बीता या आने वाला दिन; मराठी: झुकाव।
  • सही – हिंदी: ठीक; मराठी: हस्ताक्षर।
  • खोल – हिंदी: खोलना (आज्ञा); मराठी: गहरा।
  • आई – हिंदी: आना (भूतकाल); मराठी: माँ।
  • परत – हिंदी: तह; मराठी: वापस।
  • लोकभाषा के रूप: चाँदनिया = चाँदनी; आँगनिया = आँगन।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. माँ बच्चे को किन-किन नामों से पुकारती है?

मेरा खिलौना, दीठ-दिठौना, छौना, अनहोना सुख, प्यारी सलोनी।

Q2. बच्चा कैसे झूले में झूल रहा है?

सोने के झूले में, रेशम की डोरी पर।

Q3. कविता की पंक्तियाँ पूरी करो (भाव लिखो)।

  • चाँद-सितारे जाग रहे हैं, चाँदनी नाच रही है; चाँदी के फूल खिले हैं, माँ का आँगन फूला है।
  • बच्चा माँ का अनोखा सुख है; माँ गीत सुनाती है और बच्चा सो जाता है।

Q4. लोरी में माँ का वात्सल्य कैसे दिखाई देता है?

  • बच्चे को प्यार भरे नामों से पुकारती है।
  • उसे नजर से बचाने के लिए दिठौना लगाती है।
  • रूठने पर हँस-हँसकर मनाती है।
  • उसके लिए सुंदर सपनों और खिलौनों की दुनिया की कल्पना करती है।

Q5. "जीवन में माँ का स्थान असाधारण है" – चार वाक्य लिखो।

माँ हमें जन्म देती है और पालती-पोसती है। वह हमारी पहली गुरु है। हमारे दुख में सबसे पहले वही साथ देती है। इसलिए माँ का आदर और सेवा करना हमारा कर्तव्य है।

परीक्षा टिप

"लोरी" विधा का अर्थ और "वात्सल्य भाव" – ये दो शब्द उत्तर में जरूर लिखो; समोच्चारित शब्दों की तालिका भी याद करो।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 12

उपयोग हमारे

संक्षिप्त सार

"उपयोग हमारे" दूसरी इकाई का चित्र-पाठ है। इसमें हमारे काम आने वाली दो सार्वजनिक संस्थाएँ दिखाई गई हैं – डाकघर और बैंक। डाकघर में टिकट, रजिस्ट्री, मनीऑर्डर और बचत खाते की खिड़कियाँ हैं; बैंक में मैनेजर, कैशियर, पूछताछ, बचत खाता और ए.टी.एम. हैं। पाठ इन स्थानों की कार्य-प्रक्रिया समझने, वहाँ की सूचनाएँ पढ़ने और बचत की आदत डालने के लिए प्रेरित करता है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: चित्र-पाठ (देखो, समझो और चर्चा करो)।
  • डाकघर की खिड़कियाँ: रजिस्ट्री/टिकट, मनीऑर्डर, बचत खाता; पास में कूड़ादान।
  • डाकघर के फलक: "हम आपकी आवश्यकता समझते हैं।" "आपकी बचत, प्रगति देश की।"
  • बैंक के विभाग: बैंक मैनेजर, कैशियर (पैसे लेने-देने वाला), पूछताछ, बचत खाता, ए.टी.एम. (स्वचालित पैसे निकालने की मशीन), सूचना फलक।
  • बड़ों की सहायता से डाकघर जाकर टिकट खरीदना और बैंक में बाल-बचत खाता खुलवाना चाहिए।
  • डाकिया, बैंक कर्मचारी, नर्स, हवलदार जैसे लोगों से बातचीत करके उनके काम की जानकारी लेनी चाहिए।
  • अपने गाँव/शहर के महत्त्वपूर्ण स्थानों (पुलिस, अस्पताल, दमकल) के दूरध्वनि क्रमांकों की सूची बनाकर रखनी चाहिए।
  • बचत से व्यक्ति के साथ-साथ देश की भी प्रगति होती है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • डाकघर – पत्र, पार्सल, मनीऑर्डर भेजने और बचत की सरकारी संस्था।
  • रजिस्ट्री – पावती के साथ भेजा जाने वाला सुरक्षित पत्र।
  • मनीऑर्डर – डाक से पैसे भेजने की व्यवस्था।
  • कैशियर – रोकड़िया, बैंक में पैसे लेने-देने वाला।
  • पूछताछ – जानकारी देने वाली खिड़की।
  • दूरध्वनि क्रमांक – टेलीफोन नंबर।

भाषा अध्ययन

  • अंग्रेजी शब्द और हिंदी रूप: पोस्ट ऑफिस – डाकघर; कैशियर – रोकड़िया; मैनेजर – प्रबंधक; इन्क्वायरी – पूछताछ; सेविंग अकाउंट – बचत खाता।
  • सूचना-वाक्य: "कृपया कतार में खड़े रहें।" "पूछताछ के लिए खिड़की क्र. 1 पर जाएँ।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. डाकघर में कौन-कौन सी सेवाएँ मिलती हैं?

टिकट, रजिस्ट्री, मनीऑर्डर और बचत खाता।

Q2. बैंक में किन-किन के काउंटर/विभाग होते हैं?

बैंक मैनेजर, कैशियर, पूछताछ, बचत खाता; बाहर ए.टी.एम.।

Q3. "आपकी बचत, प्रगति देश की" – अर्थ समझाओ।

हमारी बचत बैंक/डाकघर में जमा होती है; उस धन से देश के विकास के काम होते हैं।

Q4. बाल-बचत खाता खोलने से क्या लाभ है?

  • बचत की आदत लगती है।
  • पैसे सुरक्षित रहते हैं।
  • जमा पर ब्याज मिलता है।
  • जरूरत पड़ने पर पैसे काम आते हैं।

Q5. संकट के समय काम आने वाले तीन दूरध्वनि क्रमांक लिखो।

पुलिस – 100, दमकल – 101, एंबुलेंस – 108 (अपने क्षेत्र के अनुसार जाँच लो)।

परीक्षा टिप

डाकघर और बैंक की सेवाएँ दो सूचियों में अलग-अलग लिखो; मिलाकर लिखने पर अंक कटते हैं।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 13

तूफानों से क्या डरना

संक्षिप्त सार

"तूफानों से क्या डरना" शिखा शर्मा की प्रेरक कविता है। कवयित्री कहती हैं कि जीवन में कठिनाइयाँ (तूफान) आती रहती हैं, उनसे डरना नहीं चाहिए। किसी से नफरत न करके सबसे प्यार करो, हिम्मत रखो, अच्छे कर्मों से जीवन में रंग भरो, हार-जीत को खेल समझो, धीरज रखो और आत्मज्ञान के दीप जलाकर अँधेरा दूर करो। कविता मनुष्य की जुझारू (संघर्ष करने वाली) वृत्ति को दिखाती है।

मुख्य बिंदु

  • कवयित्री: शिखा शर्मा – प्रसिद्ध कवयित्री।
  • विधा: प्रेरक गीत। टेक: "तूफाँ तो आते रहते हैं, इनसे भी क्या डरना जी।"
  • किसी से नफरत न करो, सबसे प्यार करो।
  • हिम्मत करने वालों को सब लोगों की मदद मिलती है।
  • सत्कर्मों की तूलिका (अच्छे कामों के ब्रश) से जीवन में रंग भरो।
  • जीवन हार-जीत का खेल है; इसे खेल समझकर खेलो, जो मिले उसे खुशी-खुशी स्वीकारो।
  • जब तक जियो, हँसकर जियो; एक दिन सबको जाना है।
  • धूप-छाँव, उजाला-अँधेरा जीवन का हिस्सा हैं; रात कितनी भी लंबी हो, उसका अंत सवेरा है।
  • समय एक-सा नहीं रहता – थोड़ा धीरज रखो।
  • देह-अभिमान (शरीर का घमंड) एक महामारी जैसा रोग है; सबको सच्ची राह दिखाना हमारी जिम्मेदारी है।
  • आत्मज्ञान के दीप जलाकर अँधेरा (अज्ञान) दूर करो।

महत्वपूर्ण शब्द

  • सत्कर्म – अच्छा कार्य।
  • तूलिका – ब्रश।
  • अभिमान – घमंड।
  • महामारी – संक्रामक भीषण रोग।
  • धीरज – धैर्य।
  • आत्मज्ञान – स्वयं का ज्ञान।
  • देह – शरीर।
  • जुझारू – संघर्ष करने वाला।

भाषा अध्ययन

  • विरुद्धार्थी शब्द: नफरत × प्यार; हार × जीत; उजाला × अँधेरा; रात × दिन (सवेरा); धूप × छाँव; खुशी × गम; सत्कर्म × दुष्कर्म; अभिमान × नम्रता।
  • पंचमाक्षर (ङ ञ ण न म) के शब्द: कंगना, कंकाल (ङ); चंचल, जंजाल, पंछी (ञ); कंठ, डंडा, घंटा (ण); अंदर, मंथन (न); चंबल, चंपारन, अचंभा (म)।
  • सुवचन: "करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।" – लगातार अभ्यास से मंदबुद्धि भी विद्वान बन जाता है।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. कविता के अनुसार हमें किससे नहीं डरना चाहिए?

तूफानों (जीवन की कठिनाइयों) से।

Q2. हिम्मत करने वालों को क्या मिलता है?

सब लोगों की मदद मिलती है।

Q3. "रात हो चाहे जितनी लंबी, उसका भी है अंत सवेरा" – भाव स्पष्ट करो।

  • दुख के दिन कितने भी लंबे हों, खत्म जरूर होते हैं।
  • उसके बाद सुख (सवेरा) आता है।
  • इसलिए निराश नहीं होना चाहिए।
  • धीरज रखकर प्रयास करते रहना चाहिए।

Q4. कविता का सार लिखो।

जीवन में सुख-दुख आते रहते हैं। हमें डरे बिना, सबसे प्रेम करते हुए, अच्छे कर्म करने चाहिए, हार-जीत को सहज मानना चाहिए, धैर्य रखना चाहिए और ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान का अँधेरा दूर करना चाहिए।

Q5. कविता से हमें कौन-से जीवन मूल्य मिलते हैं?

साहस, प्रेम, धैर्य, सकारात्मक सोच, सत्कर्म और विनम्रता (घमंड न करना)।

परीक्षा टिप

कविता का सार लिखते समय टेक की पंक्ति से शुरुआत करो और "सकारात्मक सोच" शब्द जरूर जोड़ो।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 14

कठपुतली

संक्षिप्त सार

"कठपुतली" एक कहानी है, जो अंधविश्वास से दूर रहकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने का संदेश देती है। शहर के आनंद महोत्सव में प्रीति अपने मित्रों के साथ कठपुतली का खेल देखती है, जिसका विषय है "शकुन-अपशकुन की लड़ाई"। नारियल से फूल निकलना, काली बिल्ली का रास्ता काटना और छींक आना – हर घटना के पीछे सूत्रधार वैज्ञानिक या व्यावहारिक कारण बताता है। प्रीति सीखती है – "विश्वास करो, अंधविश्वास नहीं।"

मुख्य बिंदु

  • विधा: कहानी। मुख्य संदेश: अंधविश्वास छोड़ो, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाओ।
  • आनंद महोत्सव में विभिन्न राज्यों की संस्कृति, शिल्पकला, प्रदर्शनी, मौत का कुआँ, झूले, कठपुतली नृत्य और खाने-पीने की दुकानें थीं।
  • प्रीति अपने मित्र तेजस, प्रसन्ना और मृण्मयी के साथ गई थी।
  • बोर्ड पर लिखा था – "हमें गलत साबित करके हजार रुपए ले जाइए।"
  • नारियल से फूल: नारियल में तीन छेद (आँखें) होते हैं; एक छेद सलाई से खोलकर शाम को मोगरे या चमेली की कलियाँ अंदर डाली जाती हैं, जो प्रयोग तक खिलकर फूल बन जाती हैं – यह हाथ की सफाई है, चमत्कार नहीं।
  • काली बिल्ली का रास्ता काटना: बिल्ली को उसका प्रिय भोजन चूहा दिखा, वह उसे पकड़ने लपकी; उसने जान-बूझकर रास्ता नहीं काटा।
  • छींक: लल्लन की चक्की पर शादी की मिरची पिसाई जा रही थी, इसलिए उस गली से आने वाला हर कोई छींक रहा था।
  • सूत्रधार का संदेश: हम शकुन-अपशकुन के नाम पर काम में देरी करते हैं या करते ही नहीं; इससे काम अधूरा रहता है और उचित फल नहीं मिलता – कुप्रथा से बचें।
  • अंतिम गीत: "घर-घर विज्ञान ने रोशनी फैलाई, जन-जन के मन से अंधश्रद्धा भगाई।"

महत्वपूर्ण शब्द

  • कठपुतली – धागों से नचाई जाने वाली लकड़ी की गुड़िया।
  • सूत्रधार – कठपुतली/नाटक का संचालक।
  • शकुन-अपशकुन – शुभ-अशुभ के संकेत मानना।
  • आजमाना – प्रयोग करके देखना।
  • ठिठकना – सहसा रुकना।
  • असर – परिणाम।
  • अंधश्रद्धा – बिना सोचे-समझे किया गया विश्वास।

भाषा अध्ययन

  • विशेषण – संज्ञा की विशेषता बताने वाले शब्द: काली (गुणवाचक), एक (संख्यावाचक), बहुत (परिमाणवाचक), ये (सार्वनामिक)।
  • उपसर्ग: डर – निडर; असर – बेअसर; शकुन – अपशकुन; स्वागत – सुस्वागत; पूर – भरपूर; प्रथा – कुप्रथा; व्यावहारिक – अव्यावहारिक।
  • मुहावरा: बंटाधार करना = पूरी तरह बरबाद करना।
  • सही विकल्प: (1) एक कठपुतली हाथ में एक नारियल लेकर आई। (2) सारी कठपुतलियाँ ठिठककर खड़ी हो गईं। (3) जिसे लोग अंधविश्वास समझते हैं। (4) सारा मोहल्ला ही छींक रहा है।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. आनंद महोत्सव में क्या-क्या था?

विभिन्न राज्यों की संस्कृति व शिल्पकला की दुकानें, प्रदर्शनी, मौत का कुआँ, झूले, कठपुतली नृत्य और खाने-पीने की दुकानें।

Q2. नारियल से फूल कैसे निकले?

नारियल के एक छेद को सलाई से खोलकर उसमें मोगरे/चमेली की कलियाँ डाली गई थीं, जो खिलकर फूल बन गईं।

Q3. काली बिल्ली ने रास्ता क्यों काटा?

उसे अपना प्रिय भोजन चूहा दिखा और वह उसे पकड़ने के लिए लपकी।

Q4. सब लोग छींक क्यों रहे थे?

लल्लन की चक्की पर शादी के लिए मिरची पिसाई जा रही थी; उस गली से गुजरने वाला हर कोई छींक रहा था।

Q5. अंधविश्वास दूर करने के उपाय लिखो।

  • हर घटना का कारण पूछो और जाँचो।
  • विज्ञान की जानकारी पढ़ो और फैलाओ।
  • शकुन-अपशकुन के नाम पर काम मत टालो।
  • "विज्ञान का फैलाओगे प्रकाश, तो होगा अंधविश्वास का नाश।"

परीक्षा टिप

तीनों घटनाओं (नारियल, बिल्ली, छींक) के "अंधविश्वास – असली कारण" की तालिका बनाओ; इसी पर प्रश्न आते हैं।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 15

सोना और लोहा

संक्षिप्त सार

"सोना और लोहा" रामेश्वरदयाल दुबे का संवाद है। तिजोरी से बाहर आया सोना अपनी सुंदरता, चमक और ऊँचे मूल्य पर घमंड करता है। लोहा उसे समझाता है कि किसी वस्तु का मूल्य रुपयों से नहीं, उसकी उपयोगिता से आँका जाता है – लोहा खेती, मकान, कारखाने, रसोई – हर जगह काम आता है और श्रमिकों का प्यारा है। अंत में सोना घमंड छोड़ने का वादा करता है। संवाद रूप-रंग से अधिक सद्गुणों का महत्त्व बताता है।

मुख्य बिंदु

  • लेखक: रामेश्वरदयाल दुबे (जन्म: 21 जून 1908, उ.प्र.; मृत्यु: 24 जनवरी 2011) – प्रसिद्ध बाल साहित्यकार। रचनाएँ: "अभिलाषा", "चलो-चलें", "डाल-डाल के पंछी", "माँ यह कौन", "फूल और काँटा" आदि।
  • विधा: संवाद।
  • सोने का घमंड: "मैं स्वर्ण, मेरी क्या शान है!" – चमकता पीला रंग, संसार में सबसे सुंदर; पाठ के अनुसार उसके दस ग्राम का मूल्य पच्चीस हजार, जबकि लोहा पच्चीस-तीस रुपये किलो।
  • सोना स्वयं को राजा और लोहे को नौकर कहता है; लोहा याद दिलाता है कि सोने की रक्षा का भार उसी पर है (तिजोरी लोहे की होती है)।
  • लोहे का तर्क: रुपयों में मूल्य लगाना व्यर्थ; देखना चाहिए कौन कितना उपयोगी है – सोने से पेट नहीं भरता।
  • लोहे से बनते हैं: फावड़ा, कुदाल, खुरपी, मकान, अस्त्र-शस्त्र, रोटी सेंकने का तवा; कोई बड़ा काम लोहे के बिना नहीं होता।
  • सोने से बनते हैं: अँगूठी, माला, बाली; वह राजा-महाराजाओं और धनिकों का प्यारा है।
  • लोहा किसानों-मजदूरों का प्यारा है; गरीबों की सेवा में उसे सुख मिलता है; "राजाओं के दिन लद गए, अब श्रमिकों के दिन हैं।"
  • लोहा: "आराम हराम है; श्रम में ही जीवन की सफलता है; जो काम करेंगे, उन्हीं का सम्मान होगा।"
  • अंत में सोना घबराता है; लोहा उसे छोटा भाई कहकर रक्षा का वचन देता है, बशर्ते वह घमंड छोड़ दे।

महत्वपूर्ण शब्द

  • शान – ठाट-बाट।
  • धनिक – धनवान।
  • मूल्य – महत्त्व, कीमत।
  • श्रमिक – मजदूर।
  • तलाश – खोज।
  • तिजोरी – कीमती चीजें रखने की लोहे की पेटी।

भाषा अध्ययन

  • प्रत्यय: गुण + वान = गुणवान; सुंदर + ता = सुंदरता; डर + आवना = डरावना; दिन + इक = दैनिक; उपयोग + ई = उपयोगी; घबराना + आहट = घबराहट।
  • मुहावरा: दिन लद जाना = बीती बात होना।
  • कहावत: तू डाल-डाल, मैं पात-पात = तुम निपुण हो, पर मैं तुमसे अधिक निपुण हूँ।
  • कारक चिह्न: ने, को, से, का/की/के, में/पर, अरे! – जैसे: "लोहे ने सोने को समझाया।" "तवा लोहे से बनता है।"
  • सही/गलत: (1) युद्ध में लोहे के ही अस्त्र-शस्त्र काम देते हैं – सही। (2) रोटियाँ सोने के तवे पर सेंकी जाती हैं – गलत। (3) श्रम में ही जीवन की सफलता है – सही। (4) जो काम करेंगे, उन्हीं का अब सम्मान नहीं होगा – गलत।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. सोना अपने बारे में क्या कहता है?

वह स्वर्ण है, उसकी बड़ी शान है, सब उसे चाहते हैं, उसका चमकता पीला रंग संसार में सबसे सुंदर है और उसका मूल्य बहुत अधिक है।

Q2. लोहे के अनुसार किसी वस्तु का मूल्य कैसे आँकना चाहिए?

रुपयों से नहीं, बल्कि वह कितनी उपयोगी है, इससे।

Q3. लोहे से बनने वाली वस्तुएँ लिखो।

फावड़ा, कुदाल, खुरपी, तवा, मकान का ढाँचा, अस्त्र-शस्त्र, कारखानों की मशीनें, तिजोरी।

Q4. "आराम हराम है" – लोहे ने यह क्यों कहा?

  • सोना कहता है कि उससे मेहनत नहीं होती।
  • लोहा मानता है कि श्रम में ही जीवन की सफलता है।
  • वह दिन-रात कल-कारखानों में काम करता है।
  • जो काम करते हैं, उन्हीं का सम्मान होता है।

Q5. इस संवाद से क्या सीख मिलती है?

रूप-रंग और धन पर घमंड नहीं करना चाहिए; उपयोगिता, श्रम और सद्गुण ही सच्चा मूल्य हैं। हर वस्तु और व्यक्ति का अपना-अपना महत्त्व होता है।

परीक्षा टिप

सोने और लोहे के गुणों की तुलना-तालिका बनाओ (रूप, मूल्य, उपयोग, किसका प्यारा) – लंबे उत्तर में यही ढाँचा काम आता है।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 16

(अ) क्या तुम जानते हो ?

संक्षिप्त सार

"क्या तुम जानते हो?" सामान्य ज्ञान का प्रश्न-मंच है। इसमें भारत और विश्व से जुड़े दस रोचक प्रश्न दिए गए हैं – सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर, विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय, अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, सबसे बड़ा जीव, "भोर का तारा", भारतीय मानक समय, सबसे बड़ा-छोटा राज्य, संविधान बनने का समय, राज्य-केंद्रशासित प्रदेशों की संख्या और सबसे ऊँची सड़क। नीचे इनके उत्तर दिए गए हैं।

मुख्य बिंदु

  • विधा: सामान्य ज्ञान / प्रश्न मंच (समझो और बताओ)।
  • 1. सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर: मुंबई (2011 की जनगणना के अनुसार शहर की आबादी में)।
  • 2. विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय: तक्षशिला (प्राचीन भारत) – सामान्यतः यही माना जाता है।
  • 3. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: 8 मार्च।
  • 4. विश्व का सबसे बड़ा जीव: नीली व्हेल (ब्लू व्हेल)।
  • 5. "भोर का तारा": शुक्र ग्रह – यह सूर्योदय से पहले पूर्व दिशा में चमकता दिखता है।
  • 6. भारतीय मानक समय: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर (82.5° पूर्व देशांतर) के समय को मानक माना जाता है।
  • 7. सबसे बड़ा राज्य (भूभाग): राजस्थान; सबसे छोटा: गोवा।
  • 8. संविधान बनने में समय: 2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन।
  • 9. राज्य और केंद्रशासित प्रदेश: वर्तमान में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश (2020 से)। ध्यान दो – पुस्तक 2016 की है, तब 29 राज्य और 7 केंद्रशासित प्रदेश थे।
  • 10. सबसे ऊँची सड़क: पहले लद्दाख की खारदुंगला सड़क प्रसिद्ध थी; अब लद्दाख में उमलिंग ला दर्रे की सड़क को विश्व की सबसे ऊँची मोटर-योग्य सड़क माना जाता है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • जनसंख्या – लोगों की संख्या।
  • मानक समय – पूरे देश के लिए माना गया एक समय।
  • भूभाग – क्षेत्रफल, जमीन का फैलाव।
  • केंद्रशासित प्रदेश – जिसका शासन सीधे केंद्र सरकार चलाती है।
  • प्रश्न मंच – क्विज।

भाषा अध्ययन

  • प्रश्नवाचक शब्द: कौन, कौन-सा, कब, कहाँ, कितना, किस।
  • प्रश्नवाचक वाक्य के अंत में प्रश्नचिह्न (?) लगता है – "भोर का तारा किस ग्रह को कहते हैं?"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. "भोर का तारा" किसे कहते हैं और क्यों?

शुक्र ग्रह को, क्योंकि यह भोर (सुबह) में सूर्योदय से पहले चमकता दिखता है।

Q2. विश्व का सबसे बड़ा जीव कौन-सा है?

नीली व्हेल।

Q3. भूभाग की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा और सबसे छोटा राज्य लिखो।

सबसे बड़ा – राजस्थान; सबसे छोटा – गोवा।

Q4. भारत का संविधान बनाने में कितना समय लगा?

2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन।

Q5. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस कब मनाया जाता है?

8 मार्च को।

परीक्षा टिप

राज्यों की संख्या जैसे बदलने वाले तथ्य हमेशा नवीनतम लिखो (28 राज्य, 8 केंद्रशासित प्रदेश); शिक्षक पुस्तक वाला उत्तर माँगें तो वह भी बता सको।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 17

(ब) पहेलियाँ

संक्षिप्त सार

"पहेलियाँ" पाठ में तीन छोटी काव्य-पहेलियाँ हैं। पहली पहेली मेंढक की है, दूसरी पेड़ की और तीसरी इंद्रधनुष की। हर पहेली में संकेत (सुराग) दिए गए हैं, जिन्हें ध्यान से पढ़कर उत्तर बूझना है।

मुख्य बिंदु

  • विधा: पहेली (बूझो तो जानें)।
  • पहेली 1: जल और थल दोनों में रहता है, वर्षा ऋतु का गायक है, टर्र-टर्र करता है और इधर-उधर फुदकता है – उत्तर: मेंढक।
  • पहेली 2: मिट्टी, धूप और हवा से प्रतिदिन भोजन लेता है, प्राणवायु (ऑक्सीजन) के साथ छाया भी देता है – उत्तर: पेड़।
  • पहेली 3: आधे पहिये (अर्धचक्र) जैसा, सात रंगों वाला, आकाश में बादल का साथी, शांत और मनोहर, जिसमें एक रंग नारंगी भी है – उत्तर: इंद्रधनुष।
  • पहेलियाँ बुद्धि को तेज करती हैं और ध्यान से पढ़ने-सुनने की आदत बढ़ाती हैं।

महत्वपूर्ण शब्द

  • पहेली – बुद्धि की परीक्षा लेने वाला प्रश्न, जिसमें उत्तर छिपा होता है।
  • थल – जमीन।
  • प्राणवायु – ऑक्सीजन।
  • अर्धचक्र – आधा गोला।
  • सतरंगी – सात रंगों वाला।
  • नभ – आकाश।

भाषा अध्ययन

  • ध्वन्यात्मक शब्द: टर्र-टर्र (मेंढक), फुदक-फुदक।
  • इंद्रधनुष के सात रंग (क्रम से): बैंगनी, जामुनी (नील), नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल।
  • विलोम: जल × थल, शांत × अशांत।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. "वर्षाऋतु का गायक" किसे कहा गया है?

मेंढक को।

Q2. पेड़ हमें क्या-क्या देता है?

प्राणवायु (ऑक्सीजन) और छाया; साथ ही फल, फूल, लकड़ी भी।

Q3. इंद्रधनुष की पहचान के संकेत लिखो।

अर्धचक्र जैसा आकार, सात रंग, आकाश में बादलों का साथी, शांत-मनोहर, एक रंग नारंगी।

Q4. पेड़ अपना भोजन किनसे लेता है?

मिट्टी, धूप और हवा से।

Q5. अपनी ओर से एक पहेली बनाओ।

"दिन में सोता, रात में जागता, पेड़ पर उलटा लटका रहता।" – उत्तर: चमगादड़। (अपनी पहेली बनाओ)

परीक्षा टिप

पहेली बूझते समय हर पंक्ति के संकेत अलग-अलग लिखो; सारे संकेत जिस चीज पर बैठें, वही उत्तर है।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 18

स्वास्थ्य संपदा

संक्षिप्त सार

"स्वास्थ्य संपदा" महात्मा गांधी का एक पत्र है, जो उन्होंने 8 नवंबर 1932 को येरवडा मंदिर (जेल) से "चि. जमनालाल" को लिखा था। इसमें गांधी जी स्वास्थ्य के लिए संतुलित भोजन, ताजे फल, हरी सब्जियाँ, दूध-मक्खन, चोकर वाला आटा, खुली हवा, प्राणायाम और धूप के बारे में सलाह देते हैं। मुख्य संदेश – शरीर एक अमानत है; उसकी रक्षा करना हमारा धर्म है।

मुख्य बिंदु

  • लेखक: महात्मा गांधी (जन्म: 2 अक्तूबर 1869, पोरबंदर, गुजरात; मृत्यु: 30 जनवरी 1948) – "राष्ट्रपिता"।
  • विधा: पत्र (अनौपचारिक पत्र)। स्थान-तिथि: येरवडा मंदिर, 8-11-32।
  • गांधी जी जमनालाल के जन्मदिवस पर टोकरियाँ भर आशीर्वाद भेजते हैं।
  • शरीर एक अमानत है; यथासंभव उसकी रक्षा करना रक्षक का धर्म है।
  • मौज-मजे के लिए गुड़ की एक डली भी न माँगो; पर औषधि के रूप में महँगे अंगूर मिलें तो लेने में बुराई नहीं।
  • गुड़ छोड़ देना उचित; उसकी जगह शुद्ध शहद, और मीठे फल मिलें तो उसकी भी जरूरत नहीं।
  • दूध की मात्रा बढ़ाना अच्छा; जैतून के तेल की जगह मक्खन ठीक है, क्योंकि उसमें विटामिन होते हैं जो जैतून के तेल में नहीं।
  • हरी सब्जियाँ: लौकी, फूलगोभी, पत्तागोभी, बिना बीज की सेम, बैंगन। आलू में स्टार्च होता है, वह रोटी की जगह लेता है।
  • गेहूँ का आटा चोकर मिला होना चाहिए।
  • फल: अंगूर, मौसंबी, संतरा, अनार, सेब, अनन्नास; फल अकेले और खाली पेट खाना सर्वोत्तम – "सुबह का फल सोना, दोपहर का चाँदी"।
  • सुबह गरम पानी पीना ठीक; चौबीसों घंटे खुली हवा, रोज धीरे-धीरे प्राणायाम, सुबह की धूप; फेफड़ों में शुद्ध हवा जाना अति आवश्यक।

महत्वपूर्ण शब्द

  • अमानत – धरोहर, थाती।
  • उद्वेग – प्रबलता, बेचैनी।
  • निर्दोष – दोष रहित।
  • इजाजत – अनुमति।
  • सर्वोत्तम – सर्वश्रेष्ठ।
  • चोकर – आटा छानने के बाद बचा भाग।
  • संतुलित आहार – सभी पोषक तत्वों वाला भोजन।

भाषा अध्ययन

  • खाया (मूल क्रिया) → खिलाया (प्रेरणार्थक 1) → खिलवाया (प्रेरणार्थक 2)।
  • क्रिया – काम का होना या करना बताने वाले शब्द: पियो, होते हैं, मिल सकें, थे, खाया, खिलाया, खिलवाया।
  • विशेषण के प्रकार: पाँच – संख्यावाचक (पाँच फल खाओ); कुछ – परिमाणवाचक (कुछ दूध पियो); मीठी – गुणवाचक (मीठी मौसंबी); यही – सार्वनामिक (यही सलाह ठीक है)।
  • पत्र के अंग: स्थान-तिथि, संबोधन ("चि. जमनालाल"), मुख्य भाग, समापन ("बापू के आशीर्वाद")।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. एक वाक्य में उत्तर लिखो।

  • जैतून के तेल की जगह मक्खन क्यों? – मक्खन में ऐसे विटामिन होते हैं जो जैतून के तेल में नहीं होते।
  • रक्षक का धर्म क्या है? – शरीर को अमानत समझकर यथासंभव उसकी रक्षा करना।
  • अच्छी हरी सब्जियाँ कौन-सी? – लौकी, फूलगोभी, पत्तागोभी, बिना बीज की सेम, बैंगन।
  • फेफड़ों के लिए क्या आवश्यक है? – चौबीसों घंटे शुद्ध-से-शुद्ध हवा।

Q2. गांधी जी ने गुड़ के बारे में क्या सलाह दी?

गुड़ बिल्कुल छोड़ देना चाहिए; उसकी जगह शुद्ध शहद लें, और मीठे फल मिलें तो शहद की भी जरूरत नहीं।

Q3. फल खाने के बारे में गांधी जी के विचार लिखो।

  • फल अकेले खाने से उसके गुण बढ़ते हैं।
  • खाली पेट फल खाना सर्वोत्तम है।
  • "सुबह का फल सोना, दोपहर का चाँदी।"
  • इसलिए पहला भोजन केवल फल का हो।

Q4. अच्छे स्वास्थ्य के लिए पत्र में कौन-सी आदतें बताई गई हैं?

खुली हवा में रहना, रोज प्राणायाम, सुबह की धूप, संतुलित भोजन, सुबह गरम पानी और रात में ठीक से ओढ़कर सोना।

Q5. "स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन; योगासन है उत्तम साधन" – समझाओ।

योगासन से शरीर लचीला और मजबूत होता है, मन शांत रहता है; स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है।

परीक्षा टिप

पत्र के प्रश्नों में स्थान-तिथि (येरवडा मंदिर, 8-11-1932) और "शरीर एक अमानत है" वाक्य जरूर लिखो।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 19

कागज की थैली

संक्षिप्त सार

"कागज की थैली" राजश्री अभय का कृति-पाठ है। इसमें पुराने समाचारपत्र से सुंदर और उपयोगी कागज की थैली बनाने की विधि आठ चरणों में बताई गई है। प्लास्टिक की थैलियों की जगह कागज की थैली का उपयोग करने से पर्यावरण की रक्षा होती है।

मुख्य बिंदु

  • लेखिका: राजश्री अभय। विधा: कृति / विधि-लेखन (सीखो, बनाओ और उपयोग करो)।
  • सामग्री: पुराना समाचारपत्र, कैंची, गोंद, स्केल, पेंसिल।
  • सबसे पहले पुराने समाचारपत्र का एक पन्ना लो।
  • लंबाई वाले भाग की ओर से उसे दो इंच मोड़ो।
  • उसी पन्ने को चौड़ाई वाले भाग की ओर से एक इंच मोड़ो।
  • पन्ने को मोड़कर दो बराबर भागों में बाँटो।
  • बँटे हुए पन्ने को फिर चार भागों में बाँटो।
  • आखिरी दोनों ओर के भागों में एक इंच दाएँ और एक इंच बाएँ रेखा खींचकर उसे विपरीत दिशा में मोड़ो।
  • नीचे से मोड़कर चिपकाओ; लेस, मोती, रंगीन काँच से सजाओ और स्केच पेन से चित्र बनाकर रँगो।
  • अंत में दोनों ओर डोरी डालकर आकर्षक बनाओ।
  • विधि:
  • पुरानी चीजों का पुनः उपयोग (रीसायकल) करना अच्छी आदत है।
  • प्लास्टिक मिट्टी में नहीं गलता, नालियाँ जाम करता है और पशुओं के लिए हानिकारक है; कागज की थैली गल जाती है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • सामग्री – काम के लिए आवश्यक वस्तुएँ।
  • विधि – काम करने का तरीका।
  • विभाजित – बाँटा हुआ।
  • पुनर्विभाजित – फिर से बाँटा हुआ।
  • विपरीत – उलटी।
  • आकर्षक – सुंदर, मन खींचने वाला।

भाषा अध्ययन

  • क्रम-सूचक शब्द: सर्वप्रथम, फिर, अब, अंत में।
  • आज्ञार्थक क्रियाएँ: लो, मोड़ो, खींचो, चिपकाओ, सजाओ, रँगो।
  • उपसर्ग: पुनः + विभाजित = पुनर्विभाजित; वि + परीत = विपरीत।
  • मापन शब्द: इंच, स्केल, लंबाई, चौड़ाई।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. कागज की थैली बनाने के लिए कौन-सी सामग्री चाहिए?

पुराना समाचारपत्र, कैंची, गोंद, स्केल और पेंसिल।

Q2. थैली को कैसे सजाया जाता है?

लेस, मोती और रंगीन काँच से; स्केच पेन से चित्र बनाकर रँगकर।

Q3. थैली बनाने के पहले तीन चरण लिखो।

पन्ना लेना → लंबाई की ओर से दो इंच मोड़ना → चौड़ाई की ओर से एक इंच मोड़ना।

Q4. प्लास्टिक की जगह कागज की थैली क्यों उपयोग करनी चाहिए?

  • प्लास्टिक मिट्टी में नहीं गलता, प्रदूषण बढ़ाता है।
  • नालियाँ जाम होती हैं।
  • पशु प्लास्टिक खाकर बीमार होते हैं।
  • कागज की थैली गल जाती है और दोबारा बनाई जा सकती है।

Q5. पुराने अखबार से और क्या-क्या बना सकते हैं?

टोपी, लिफाफा, कागज की नाव, फूल, पुस्तक का कवर।

परीक्षा टिप

विधि लिखते समय चरणों पर क्रमांक दो और हर चरण की शुरुआत क्रिया से करो – "मोड़ो", "चिपकाओ"।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 20

टीटू और चिंकी

संक्षिप्त सार

"टीटू और चिंकी" डॉ. विमला भंडारी की कहानी है। टीटू गिलहरी पेड़ की खोखल में और चिंकी चिड़िया उसी पेड़ की शाखा पर घोंसले में रहती थी। उनके बच्चे "पेड़ हमारा है" कहकर झगड़ने लगे। माताओं ने उन्हें पुरानी बात बताई कि कैसे आँधी-बारिश में दोनों ने एक-दूसरे के बच्चों और अंडों को बचाया था। तभी एक साँप पेड़ पर चढ़ा; चिंकी ने तने पर चोंच मारकर गोंद निकाला, जिससे साँप फिसलकर लौट गया। बच्चों ने एकता की ताकत और पड़ोसी धर्म समझ लिया।

मुख्य बिंदु

  • लेखिका: डॉ. विमला भंडारी – संवेदना से कहानीकार, मन से बाल साहित्यकार, सक्रियता से सामाजिक कार्यकर्ता।
  • विधा: कहानी। संदेश: मिल-जुलकर रहो, संकट में एक-दूसरे का साथ दो।
  • टीटू का घर तने की खोखल में; चिंकी का घोंसला शाखाओं पर। चिंकी दाना चुगने जाती तो टीटू सब बच्चों का ध्यान रखती।
  • झगड़ा: टीटू के बच्चे (मिंटू) – "तना हमारा, तो शाखाएँ और फल भी हमारे; चिड़िया के बच्चे फल जूठे करते हैं।" चिंकी के बच्चे (रिंकी) – "टहनियों पर हमारा बसेरा है, तुम्हें टहनियों तक नहीं आने देंगे।"
  • बच्चे एक-दूसरे को पेड़ से भगाना चाहते थे; माताएँ समझा-समझाकर थक गईं।
  • पुरानी घटना: बच्चों के जन्म के समय तेज आँधी आई – दोनों ने मिलकर अंडों को खोखल में रखा; फिर भारी बारिश से खोखल डूबने लगी, तो सबको घोंसले में पहुँचाकर पत्तों से ढँक दिया।
  • सीख: "अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।"
  • साँप का संकट: बिल में छिपा साँप मौका देखकर पेड़ पर चढ़ने लगा; चिंकी चिल्लाई – "सावधान टीटू बहन, बच्चों को मेरे घोंसले में छिपा दो।"
  • चिंकी और उसके बच्चों ने तने पर चोंच मारी; गाढ़ा चिपचिपा दूध (गोंद) बहने लगा, साँप का चढ़ना मुश्किल हुआ और वह थक-हारकर लौट गया।
  • बच्चे समझ गए – "एक और एक ग्यारह होते हैं।" विचार: "जीवदया ही भूतदया है।"

महत्वपूर्ण शब्द

  • खोखल – पेड़ के तने का बड़ा छेद, कोटर।
  • बसेरा – घर, आवास।
  • मौका – अवसर।
  • तना – पेड़ का निचला भाग।
  • पौ फटना – सुबह होना।
  • उतारू – किसी काम पर तुला हुआ।

भाषा अध्ययन

  • मुहावरा: एक और एक ग्यारह होना = एकता में शक्ति होती है; लड़ाई पर उतारू होना = लड़ने को तैयार होना; राहत की साँस लेना = चिंता दूर होना।
  • कहावत: अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता = अकेला व्यक्ति बड़ा काम नहीं कर सकता।
  • रचना के आधार पर वाक्य: सरल – "टीटू गिलहरी पेड़ की खोखल में रहती थी।" संयुक्त – "चिंकी चिल्लाई और तने पर चोंच मारने लगी।" मिश्र – "जहाँ-जहाँ चिंकी की चोंच लगी, वहाँ से गोंद बहने लगा।"
  • विरामचिह्न लगाओ: काबुलीवाले ने पूछा, "बिटिया, अब कौन-सी चूड़ियाँ चाहिए?" मैंने अपनी गुड़िया दिखाकर कहा, "मेरी गुड़िया के लिए अच्छी-सी चूड़ियाँ दे दो, जैसे – लाल, नीली, पीली।"

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. टीटू और चिंकी कहाँ रहती थीं?

टीटू गिलहरी पेड़ के तने की खोखल में और चिंकी चिड़िया शाखाओं पर बने घोंसले में।

Q2. बच्चों में झगड़ा क्यों हुआ?

दोनों के बच्चे कहते थे कि पेड़ उनका है; टीटू के बच्चों को शिकायत थी कि चिड़िया के बच्चे फल जूठे करते हैं।

Q3. आँधी और बारिश के समय टीटू और चिंकी ने एक-दूसरे की कैसे मदद की?

  • आँधी में घोंसला गिरने का डर था – अंडे खोखल में सुरक्षित रखे।
  • बारिश से खोखल डूबने लगी – सब बच्चों को घोंसले में पहुँचाया।
  • पत्तों से घोंसला ढँक दिया।
  • सुबह होने पर राहत की साँस ली।

Q4. चिंकी ने साँप से बच्चों को कैसे बचाया?

उसने टीटू को सावधान किया, बच्चों को अपने घोंसले में छिपाने को कहा और तने पर चोंच मारकर गोंद निकाला, जिससे साँप फिसलने लगा और लौट गया।

Q5. प्राणियों को जलचर, थलचर, नभचर और उभयचर में बाँटो।

  • जलचर: मछली, व्हेल। थलचर: गाय, हाथी।
  • नभचर: चिड़िया, तोता। उभयचर: मेंढक, कछुआ।

परीक्षा टिप

कहानी का सारांश "झगड़ा → पुरानी याद → साँप का संकट → एकता की सीख" इन चार भागों में लिखो।

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६ वी · हिंदी (सुलभभारती) · पाठ 21

वह देश कौन-सा है ?

संक्षिप्त सार

"वह देश कौन-सा है ?" रामनरेश त्रिपाठी की देशभक्ति कविता है। हर पद में कवि भारत की एक विशेषता बताकर पूछते हैं – "वह देश कौन-सा है?" प्रकृति की गोद में बसा, सागर जिसके चरण धोता है, हिमालय जिसका मुकुट है, अमृत जैसी नदियाँ, रसीले फल-मेवे, सुगंधित फूल, हरियाली, अनंत धन और प्राचीन सभ्यता वाला – अंत में कवि स्वयं उत्तर देते हैं कि भारत के सिवाय ऐसा दूसरा देश कौन-सा है!

मुख्य बिंदु

  • कवि: रामनरेश त्रिपाठी (जन्म: 4 मार्च 1889; मृत्यु: 16 जनवरी 1962) – राष्ट्रीय-सांस्कृतिक काव्यधारा के प्रमुख कवि। रचनाएँ: "मिलन", "स्वप्न", "पथिक", "मानसी" और बालोपयोगी साहित्य।
  • विधा: देशभक्ति कविता (प्रश्न शैली)। विषय: भारत की महिमा और सुंदरता।
  • मन मोहने वाली प्रकृति की गोद में बसा है; वहाँ स्वर्ग जैसा सुख है।
  • सागर (रत्नेश) निरंतर उसके चरण धोता है; हिमालय उसका मुकुट है।
  • नदियाँ अमृत (सुधा) की धारा बहाती हैं; देश हरा-भरा और सुंदर है।
  • रसीले फल, कंद, अनाज, मेवे – सब उसके अंगों पर सजे हैं।
  • सुगंधित सुंदर फूल दिन-रात हँसते (खिलते) रहते हैं।
  • मैदान, पर्वत, वनों में हरियाली लहराती है; वहाँ आनंद ही आनंद है।
  • धरती अनंत धन (खनिज, संपदा) से भरी है; वह संसार का शिरोमणि है।
  • संसार में सबसे पहले सभ्य हुआ और आगे भी रहेगा; जन-जन का दुलारा है।
  • नई क्रांति के पुजारी, सेवक और सपूत जिसके हैं – वह भारत ही है।

महत्वपूर्ण शब्द

  • मनमोहिनी – मन को मोहित करने वाली।
  • रत्नेश – सागर (रत्नों का स्वामी)।
  • निरंतर – सदैव।
  • सुधा – अमृत।
  • सलोना – सुंदर।
  • नाज – अनाज।
  • प्रसून – फूल।
  • गिरि – पर्वत।
  • शिरोमणि – सबसे श्रेष्ठ।
  • दुलारा – प्यारा।

भाषा अध्ययन

  • काल (क्रिया का समय): भूतकाल – "भारत सबसे पहले सभ्य था।" वर्तमानकाल – "भारत सुंदर है।" भविष्यकाल – "भारत सदा महान रहेगा।"
  • सकर्मक: राम क्रिकेट खेलता है।
  • अकर्मक: बच्चे खेलते हैं।
  • संयुक्त: वह खेलने लगा।
  • सहायक: वे खेल रहे हैं।
  • प्रेरणार्थक: माँ बच्चे को खिलाती है / शिक्षक बच्चों से खेल खिलवाते हैं।
  • क्रिया के रूप ("खेलना"):
  • अलंकार की झलक (मानवीकरण): सागर चरण धोता है, हिमालय मुकुट है, फूल हँस रहे हैं।

५ महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1. भारत का मुकुट कौन है और उसके चरण कौन धोता है?

हिमालय उसका मुकुट है और सागर (रत्नेश) उसके चरण धोता है।

Q2. कविता में भारत की कौन-सी प्राकृतिक संपदा बताई गई है?

अमृत जैसी नदियाँ, रसीले फल, कंद, अनाज, मेवे, सुगंधित फूल, हरियाली और धरती में भरा अनंत धन।

Q3. "सबसे प्रथम जगत में जो सभ्य था, रहेगा" – भाव लिखो।

  • भारत की सभ्यता संसार की सबसे पुरानी सभ्यताओं में है।
  • यहाँ ज्ञान, कला और संस्कृति बहुत पहले विकसित हुई।
  • कवि को विश्वास है कि यह गौरव आगे भी बना रहेगा।

Q4. कविता के आधार पर भारत की विविधता और विशेषताएँ लिखो।

  • पर्वत, सागर, नदियाँ, मैदान और वन – सब प्रकार की प्रकृति।
  • तरह-तरह के फल, अनाज और फूल।
  • खनिज और प्राकृतिक धन की भरमार।
  • प्राचीन सभ्यता; देश के लिए समर्पित सपूत।
  • विविधता में एकता – सब लोगों का प्यारा देश।

Q5. "वह देश कौन-सा है?" – कवि ने प्रश्न शैली क्यों अपनाई?

प्रश्न पूछकर पाठक को सोचने पर विवश किया है; हर विशेषता का उत्तर एक ही है – भारत, जिससे देश का गौरव और देशप्रेम बढ़ता है।

परीक्षा टिप

भावार्थ लिखते समय हर पद की एक विशेषता क्रम से लिखो और अंत में कवि का उत्तर – "भारत सिवाय दूजा वह देश कौन-सा है?" – जरूर जोड़ो।

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