संक्षेप में
दो या अधिक शब्दों को विभक्ति-चिह्न या जोड़ने वाले शब्द हटाकर छोटा करके एक नया शब्द बनाना समास है। बने हुए शब्द को समस्त पद और उसे फिर से खोलना समास-विग्रह कहलाता है। जैसे — राजा का पुत्र = राजपुत्र।
- संधि में वर्ण मिलते हैं, समास में शब्द मिलते हैं।
- हिंदी में समास के छह भेद माने जाते हैं।
Marathi help: मराठीत मुख्य चार प्रकार (अव्ययीभाव, तत्पुरुष, द्वंद्व, बहुव्रीही) मानतात आणि द्विगू व कर्मधारय हे तत्पुरुषाचे उपप्रकार असतात; हिंदीत हे सहा स्वतंत्र प्रकार म्हणून शिकवले जातात.
छह भेद
| समास | पहचान | उदाहरण (समस्त पद = विग्रह) |
|---|---|---|
| अव्ययीभाव | पहला पद अव्यय और प्रधान; पूरा शब्द अव्यय की तरह | प्रतिदिन = हर दिन, यथाशक्ति = शक्ति के अनुसार, आजन्म = जन्म से लेकर, भरपेट = पेट भरकर |
| तत्पुरुष | दूसरा पद प्रधान; बीच का कारक-चिह्न लुप्त | राजपुत्र = राजा का पुत्र, देशभक्ति = देश की भक्ति, रसोईघर = रसोई के लिए घर, हस्तलिखित = हाथ से लिखा, पापमुक्त = पाप से मुक्त, ग्रामवास = ग्राम में वास |
| कर्मधारय | विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय | नीलकमल = नीला है जो कमल, महात्मा = महान है जो आत्मा, चंद्रमुख = चंद्र के समान मुख |
| द्विगु | पहला पद संख्यावाचक; समूह का बोध | त्रिभुवन = तीन भुवनों का समूह, चौराहा = चार राहों का समूह, सप्ताह = सात दिनों का समूह, नवरत्न = नौ रत्नों का समूह |
| द्वंद्व | दोनों पद प्रधान; बीच में 'और / या' | माता-पिता = माता और पिता, सुख-दुख = सुख और दुख, पाप-पुण्य = पाप या पुण्य, दाल-रोटी = दाल और रोटी |
| बहुव्रीहि | दोनों पद मिलकर किसी तीसरे का बोध | लंबोदर = लंबा है उदर जिसका (गणेश), दशानन = दस हैं आनन जिसके (रावण), चक्रपाणि = चक्र है हाथ में जिसके (विष्णु), नीलकंठ = नीला है कंठ जिसका (शिव) |
तत्पुरुष के कारक-आधारित उदाहरण
- कर्म: स्वर्गप्राप्त = स्वर्ग को प्राप्त
- करण: तुलसीकृत = तुलसी द्वारा कृत
- संप्रदान: विद्यालय = विद्या के लिए आलय
- अपादान: जन्मांध = जन्म से अंधा
- संबंध: राष्ट्रपति = राष्ट्र का पति
- अधिकरण: आपबीती = आप पर बीती
कर्मधारय या बहुव्रीहि?
एक ही शब्द विग्रह के अनुसार अलग समास बन सकता है:
- नीलकंठ = नीला है जो कंठ → कर्मधारय; नीला है कंठ जिसका, अर्थात शिव → बहुव्रीहि
- पीतांबर = पीला है जो अंबर (वस्त्र) → कर्मधारय; पीले हैं अंबर जिसके, अर्थात श्रीकृष्ण → बहुव्रीहि
याद रखें: विग्रह में "जिसका / जिसके / जिसकी" और किसी तीसरे व्यक्ति का नाम आए, तो बहुव्रीहि।
अभ्यास प्रश्न (उत्तर सहित)
Q1. 'यथाशक्ति' का विग्रह कीजिए और समास लिखिए।
उत्तर: शक्ति के अनुसार — अव्ययीभाव समास।
Q2. 'पंचवटी' — समास का भेद?
उत्तर: द्विगु समास (पाँच वटों/वृक्षों का समूह)।
Q3. 'दशानन' का विग्रह कीजिए।
उत्तर: दस हैं आनन (मुख) जिसके — अर्थात रावण (बहुव्रीहि)।
Q4. 'राजमहल' — विग्रह और समास?
उत्तर: राजा का महल — तत्पुरुष (संबंध तत्पुरुष)।
Q5. 'भाई-बहन' — समास का नाम?
उत्तर: द्वंद्व समास (भाई और बहन)।
परीक्षा टिप
पहले विग्रह लिखें, फिर भेद तय करें: पहला पद अव्यय → अव्ययीभाव; बीच में का/से/के लिए → तत्पुरुष; 'जो/के समान' → कर्मधारय; संख्या + समूह → द्विगु; 'और/या' → द्वंद्व; 'जिसका' + तीसरा अर्थ → बहुव्रीहि।